भक्ति की गंगा में डूबा हरिपुर भानदेव, छठवें दिन की कथा ने छुआ आत्मा का स्वर!
आध्यात्मिक चेतना, समर्पण और वर्तमान में जीने का मिला संदेश!
दर्पण न्यूज 24/7, हल्दूचौड़।
हरिपुर भानदेव स्थित कालिका मंदिर परिसर इन दिनों भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। यजमान गणेश दत्त बमेटा के आवास पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा माहात्म्य के छठवें दिन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए। वातावरण में गूंजते मंत्रोच्चार, भजनों की मधुर धुन और श्रद्धा से भरे चेहरों ने पूरे क्षेत्र को एक जीवंत आध्यात्मिक धरोहर का रूप दे दिया।
कथावाचक नमन कृष्ण महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में जीवन के गहरे आध्यात्मिक सूत्रों को सरल और सहज उदाहरणों के माध्यम से श्रोताओं के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि मनुष्य का जीवन सुख और दुख के द्वंद्व में उलझा रहता है, और जब तक व्यक्ति अपने मन को परिस्थितियों के अधीन रखता है, तब तक उसे न तो सच्चा सुख मिल सकता है और न ही आंतरिक शांति।
महाराज ने स्पष्ट किया कि वास्तविक आनंद तभी संभव है, जब मनुष्य स्वयं को पूर्ण रूप से ईश्वर के चरणों में समर्पित कर दे। उन्होंने एक मार्मिक उदाहरण के जरिए समझाया कि जीवन में कई बार सुखद क्षणों के बीच भी किसी प्रिय की स्मृति उस आनंद को फीका कर देती है। यह मन की चंचलता और अतीत में उलझे रहने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का अधिकांश दुख इसी कारण जन्म लेता है कि वह या तो अतीत में जीता है या भविष्य की चिंता में उलझा रहता है, जबकि जीवन का वास्तविक सत्य केवल वर्तमान क्षण में ही निहित है। “जो वर्तमान को जीना सीख गया, वही जीवन के सार को समझ गया,” इस संदेश ने श्रोताओं को भीतर तक झकझोर दिया।
प्रवचन में समभाव के महत्व को भी रेखांकित करते हुए नमन कृष्ण महाराज ने कहा कि सुख और दुख को समान दृष्टि से स्वीकार करने वाला ही सच्चा साधक बनता है। जब व्यक्ति यह मान लेता है कि हर घटना ईश्वर की इच्छा से हो रही है, तब उसके भीतर का द्वंद्व स्वतः समाप्त होने लगता है और वह शांति के मार्ग पर अग्रसर होता है।
भगवान की लीलाओं के माध्यम से यह भी बताया गया कि जीवन के उतार-चढ़ाव ही व्यक्ति को सही दिशा दिखाते हैं। भक्ति, समर्पण और वर्तमान में जीने का यह संदेश श्रद्धालुओं के हृदय में गहराई तक उतर गया, जिससे कथा केवल एक धार्मिक आयोजन न रहकर एक जीवंत आध्यात्मिक अनुभव बन गई।
कथा स्थल पर सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया। सभी ने भक्ति भाव से कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य महसूस किया।
इस अवसर पर यजमान गणेश दत्त बमेटा, विजय बमेटा सहित पूर्व ग्राम प्रधान उमेश कबड़वाल, दया बमेटा, खीमानंद बमेटा, बालादत्त दुमका, हरीश चंद्र तिवारी, आचार्य शंभू दत्त दुर्गापाल, केशव दत्त कबड़वाल, तारा दत्त बमेटा, कमलेश बमेटा, जगदीश बमेटा,नवीन बमेटा,नवीन तिवारी,संजय बमेटा,दिनेश बमेटा,भुवन बमेटा, सुरेश जोशी, बालादत्त पांडे, जीतू तिवारी समेत सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बन रहा है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजने का सशक्त माध्यम भी सिद्ध हो रहा है।
