खबरें शेयर करें -

 

हाईकोर्ट के दो अहम फैसले:

ओके होटल को चार सप्ताह में हटाना होगा अतिक्रमण! दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने के प्रावधान पर सरकार से जवाब तलब।

ओके होटल मामले में सड़क के केंद्र से होगी पैमाइश, 3.5 मीटर अवैध हिस्सा हटाने के निर्देश

नैनीताल। हाईकोर्ट ने हल्द्वानी स्थित ओके होटल की सुधार याचिका का निस्तारण करते हुए स्पष्ट किया है कि होटल के अवैध निर्माण अथवा अतिक्रमण की पैमाइश सड़क के केंद्र से की जाएगी। अदालत ने निर्देश दिया कि सड़क के मध्य से 12 मीटर की सीमा के आधार पर की गई पैमाइश में जो अवैध निर्माण सामने आएगा, उसे हटाने की कार्रवाई चार सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई।

दरअसल, याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह आशंका जताई गई थी कि सड़क के केंद्र के बजाय भवन के सामने वाले हिस्से से 12 मीटर की दूरी निर्धारित करते हुए उसे बड़े हिस्से को ध्वस्त करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। इसी आशंका को लेकर अदालत से स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया था।

सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से स्पष्ट किया गया कि निगम द्वारा 8 जनवरी 2024 को जारी किए गए नोटिस में भी अतिक्रमण की पैमाइश सड़क के केंद्र से ही की गई थी। इस पैमाइश में होटल का करीब 3.5 मीटर हिस्सा अतिक्रमण की जद में पाया गया था। नगर निगम ने इस स्थिति पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 12 मीटर की पैमाइश सड़क के मध्य बिंदु से की जाएगी और इस आधार पर जितना हिस्सा अवैध निर्माण के रूप में सामने आएगा, केवल उसी हिस्से को हटाया जाएगा। अदालत के इस स्पष्टीकरण के बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह आदेश का पालन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

अदालत ने याचिकाकर्ता के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए होटल के सामने स्थित अवैध हिस्से को हटाने की कार्रवाई आज से चार सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से पूरी करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कोर्ट ने सुधार याचिका का निस्तारण कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सड़क की पैमाइश को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है।

दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक का मामला, हाईकोर्ट ने सरकार से चार सप्ताह में मांगा जवाब।

नैनीताल। हाईकोर्ट ने नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों में दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने वाले प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कानून के इस प्रावधान को चुनौती दिए जाने के चलते महाधिवक्ता को भी नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

यह याचिका किच्छा निवासी नईम उल की ओर से दायर की गई है। याचिका में उत्तराखंड नगर पालिका एवं नगर निगम संशोधन अधिनियम, 2002 के उस प्रावधान को चुनौती दी गई है, जिसके तहत दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति के नगरीय निकाय चुनाव लड़ने पर रोक का प्रावधान है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि पंचायत चुनावों में दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक का प्रावधान 27 सितंबर 2009 से लागू किया गया था, जबकि नगर निकायों के लिए यह कटऑफ वर्ष 2002 रखा गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि परिसीमन के कारण ग्रामीण क्षेत्र के नगर निकाय में शामिल होने से ऐसे नागरिक, जो पहले पंचायत चुनाव लड़ने के लिए पात्र थे, अचानक नगरीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो गए हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि एक ही राज्य में एक समान विषय पर दो अलग-अलग कटऑफ तारीख निर्धारित करना नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के विपरीत है। याचिका में मांग की गई है कि नगर निकायों के लिए भी कटऑफ डेट को वर्ष 2009 किया जाए, ताकि पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों के लिए पात्रता के संबंध में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कानून के प्रावधान को चुनौती दिए जाने पर महाधिवक्ता को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह बाद की तारीख निर्धारित की है।

उत्तराखंड