देवखड़ी नाला अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से सभी रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा।
नैनीताल। हल्द्वानी के दमुवाडूंगा क्षेत्र स्थित देवखड़ी नाले पर हो रहे कथित अतिक्रमण को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने नैनीताल जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि नाले की मूल सीमाओं, राजस्व अभिलेखों, स्वीकृत नक्शों और हालिया सर्वे से संबंधित सभी दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएँ। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अतिक्रमण का निर्धारण केवल गूगल मैप या इंटरनेट आधारित मानचित्रों के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए अधिकृत राजस्व रिकॉर्ड और प्रमाणित नक्शे आवश्यक हैं।
अदालत ने प्रशासन को आदेश दिया है कि देवखड़ी नाले से जुड़े सभी दस्तावेज न्यायमित्र अधिवक्ता आदित्य प्रताप सिंह को उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में क्षेत्र के दर्जनों परिवारों को अतिक्रमण हटाने के नोटिस जारी किए गए थे। प्रभावित लोगों का कहना है कि उनके पास वैध रजिस्ट्री, पुराने नक्शे और भूमि अभिलेख मौजूद हैं, इसके बावजूद उन्हें गलत तरीके से नाले की ज़मीन पर बसे होने का आरोप लगाकर नोटिस थमा दिए गए। कुछ मामलों में आपत्तियाँ दाखिल होने के बाद दस्तावेज सही पाए जाने पर प्रशासन को नोटिस वापस लेने पड़े थे, जिससे मामले पर और विवाद बढ़ गया।
हाईकोर्ट ने माना कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच आवश्यक है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा नहीं हो जाता, तब तक किसी भी परिवार पर जबरन कार्रवाई न की जाए। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि प्रशासन द्वारा चिन्हित अतिक्रमण वास्तव में नाले की भूमि पर स्थित हैं या नहीं।
देवखड़ी नाले से जुड़े मामले ने व्यापक चर्चा और विरोध को जन्म दिया है। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि नाले की वास्तविक स्थिति और जमीन की असली सीमाओं से जुड़ी सच्चाई सामने आएगी।
