जौनसार-भावर में ऐतिहासिक फैसला: अब शादियां होंगी पूरी सादगी से!
दर्पण न्यूज 24*7 की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट!
देहरादून। उत्तराखंड के जौनसार-भावर क्षेत्र में शादी-समारोहों में बढ़ती फिजूलखर्ची और दिखावे पर लगाम लगाने के लिए 25 गांवों ने मिलकर एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। दोहा गांव में आयोजित महापंचायत में खत शैली सामाजिक व्यवस्था से जुड़े गांवों ने सर्वसम्मति से तय किया कि अब शादियों में शराब, फास्ट फूड और महंगे तोहफे पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे। इस फैसले का उल्लंघन करने वाले पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
महापंचायत की अध्यक्षता खत के सदर स्याणा राजेंद्र सिंह तोमर ने की। बैठक में यह माना गया कि समाज में दिखावे की बढ़ती प्रवृत्ति और अनावश्यक खर्च गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों को भारी आर्थिक बोझ में धकेल रही है। अमीर परिवारों की बराबरी करने के चक्कर में कई लोग कर्ज लेने को मजबूर हो रहे थे। इसी चिंता को देखते हुए गांवों ने संयुक्त रूप से यह सख्त निर्णय लिया।
नए नियमों के अनुसार अब किसी भी शादी या शुभ आयोजन में शराब, बीयर और चाऊमीन, मोमो, टिक्की, चाट जैसे फास्ट फूड परोसना पूरी तरह वर्जित होगा। साथ ही महंगे तोहफे, चांदी के सिक्के और ड्राई फ्रूट्स देने-लेने पर भी रोक होगी। परंपरा के सम्मान के लिए सिर्फ मामा पक्ष को आटा, चावल और बकरा लाने की अनुमति दी गई है, जबकि बेटी पक्ष द्वारा बकरा देने की प्रथा को समाप्त कर दिया गया है।
महिलाओं के लिए भी एक सामाजिक समानता वाला नियम तय किया गया है—अब किसी भी शादी या कार्यक्रम में महिलाएं केवल तीन पारंपरिक गहने ही पहनेंगी। इससे गरीब परिवारों पर महंगे सोने के गहने बनवाने का दबाव खत्म होगा और समाज में बराबरी बनी रहेगी।
जौनसार-भावर की खत शैली व्यवस्था बेहद पुरानी सामाजिक पद्धति है, जिसमें कई गांव मिलकर सामूहिक रूप से फैसले लेते हैं। इस प्रणाली का नेतृत्व स्याणा करते हैं और इसे हजारों वर्षों पुरानी परंपरा माना जाता है।
गांवों का कहना है कि यह निर्णय न केवल अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाएगा, बल्कि पहाड़ की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सामंजस्य को भी संरक्षित करेगा। जौनसार-भावर के लोगों में इस बात को लेकर संतोष है कि यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए समाज सुधार का एक मजबूत उदाहरण बनेगा।
