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उत्तराखंड की धरती पर गूंजे वैदिक यज्ञों के प्रमाण, 1700 वर्ष पूर्व राजा शीलवर्मन ने कराए थे चार अश्वमेध यज्ञ!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो, देहरादून।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक और वैदिक विरासत को लेकर एक बार फिर ऐतिहासिक तथ्य सामने आए हैं। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि अश्वमेध यज्ञ वैदिक धर्म और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसे प्राचीन काल में राजाओं द्वारा राज्य की शक्ति और समृद्धि बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता था। उत्तराखंड में भी अश्वमेध यज्ञ होने के प्रमाण मिले हैं और हमारा मानना है कि जिस प्रकार प्राचीन काल में पूजा-अर्चना और अनुष्ठान होते थे, वैसी ही पूजा यहां भी की जानी चाहिए।
मंगलवार को अपने निजी आवास पर आयोजित बैठक में प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के साथ अश्वमेध यज्ञ वेदिकाओं को लेकर मंथन किया। उन्होंने बताया कि जनपद देहरादून के कालसी-हरिपुर क्षेत्र में राजा शीलवर्मन ने लगभग 1700 वर्ष पूर्व चार अश्वमेध यज्ञ कराए थे। इसके प्रमाण स्वरूप यहां खुदाई में तीन यज्ञ वेदिकाएं मिल चुकी हैं, जबकि चौथी वेदिका की खोज के लिए खुदाई कार्य जारी है।
महाराज ने कहा कि उत्तरकाशी जनपद के पुरोला क्षेत्र में भी अश्वमेध यज्ञ के प्रमाण मिले हैं। ये यज्ञ वेदिकाएं वैदिक धर्म और संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं, जिनके संरक्षण के साथ-साथ वहां पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाने के विषय में भी चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि अश्वमेध यज्ञ स्थल पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने दोबारा खुदाई शुरू कर दी है। खुदाई के दौरान मिट्टी के बर्तन, जले हुए कोयले और ईंटें प्राप्त हुई हैं। ऐतिहासिक अभिलेखों में यज्ञ के दौरान चार वेदिकाओं का उल्लेख मिलता है, जिनमें से तीन पहले से स्थापित हैं। चौथी वेदिका के महत्व को देखते हुए संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक अश्वमेध यज्ञ स्थल में खुदाई का कार्य तेज कर दिया गया है। खुदाई का मुख्य उद्देश्य राजा शीलवर्मन द्वारा कराए गए चार अश्वमेध यज्ञ स्थलों की चौथी वेदिका को खोज निकालना है।
बैठक में आर्कियोलॉजिकल विभाग के सुपरिटेंडेंट डॉ. मोहन चंद्र जोशी, गढ़वाल विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नागेंद्र रावत, सुनील नेगी, दून विश्वविद्यालय के डॉ. मानवेंद्र बड़थ्वाल, गुरुकुल महिला महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर अर्चना डिमरी सहित कई विशेषज्ञ और अधिकारी उपस्थित रहे।