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 “हक़ की जमीन पर भरोसा टूट रहा है”
वनाधिकार समिति की अहम बैठक में छल और लटकते फैसलों पर फूटा गुस्सा, राज्य स्तरीय समिति से सीधे अपना पक्ष रखने की मांग।

दर्पण न्यूज 24*7

लालकुआं।

बिंदुखत्ता के इंदिरा नगर में रविवार को हुई वनाधिकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक भावनाओं, पीड़ा और आक्रोश का संगम बन गई। लंबे समय से राजस्व गांव का दर्जा और वनाधिकार के वैध दावों को लेकर संघर्षरत बिंदुखत्ता वासियों ने अब शासन–प्रशासन पर ही नियम विरुद्ध कार्य करने का गंभीर आरोप लगा दिया।

समिति पदाधिकारियों ने बताया कि वर्षों की मेहनत से तैयार की गई संयुक्त दावों की फाइल पूरी प्रक्रिया से गुजरकर खंड स्तरीय, जिला स्तरीय और फिर शासन स्तर तक पहुंच चुकी थी। उम्मीदें थीं कि इस बार न्याय मिलेगा, मगर 16 महीने तक फाइल को शासन में दबाए रखने के बाद उसे फिर से जिला स्तरीय समिति को लौटा दिया गया। जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा कई नई आपत्तियां लगाकर फाइल को वापस खंड स्तरीय समिति को भेज दिया गया।

बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि यह निर्णय उनके आत्मसम्मान और संघर्ष दोनों के साथ खिलवाड़ जैसा है। उन्होंने साफ कहा कि बिंदुखत्ता वासियों को ऐसा लग रहा है जैसे उन्हें बार-बार “लटकाओ, भटकाओ और थकाओ” नीति के तहत परेशान किया जा रहा हो।

वनाधिकार समिति ने इन आपत्तियों के खिलाफ राज्य निगरानी समिति को पत्र भेजकर मांग की है कि—
“हमारी पत्रावली पूर्ण और वैध है। यदि आपत्तियां लगाई गई हैं तो पहले हमारा पक्ष भी सुना जाए।”

लगभग पाँच घंटे चली इस निर्णायक बैठक की अध्यक्षता समाजसेवी भगवान धामी ने की, जबकि संचालन दीपक जोशी ने। बैठक में समिति के सचिव भुवन भट्ट सहित आरसी पुरोहित, रमेश देवराड़ी, भुवन शर्मा, दीपक नेगी, बलवंत सम्मल, प्रमोद कालोनी, कमल जोशी, नंदन बोरा, इन्द्र सिंह पनेरी, पंकज कोरंगा, दीपक सुयाल, बसन्त पाण्डेय, हरेंद्र रौतेला, प्रताप कोश्यारी, विक्रम सिंह और आनंद सिजवाली समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीणों का कहना था कि पीढ़ियों से बसे बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने और वनाधिकार दिलाने की इस लड़ाई ने अब तक कई मोड़ देखे, मगर सरकारी मशीनरी की यह “वापसी और आपत्ति” की प्रक्रिया दिल तोड़ देने वाली है।

“हम सिर्फ अपने हक़ की मांग कर रहे हैं… न्याय के लिए कितनी बार और कतार में खड़ा रहना होगा?”
बैठक में यह सवाल बार-बार गूंजता रहा।

 

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