

सप्त रंगों में सजी भारतीय संस्कृति की झलक, ‘संस्कार 2026’ में बच्चों ने मंच पर जीवंत की देश की विरासत!
सांसद अजय भट्ट ने बच्चों को दिया संस्कारवान बनने और नशे से दूर रहने का संदेश, रंगारंग प्रस्तुतियों ने मोहा मन।
दर्पण न्यूज 24/7 | हल्दूचौड़।
कहीं लोक परंपराओं की गूंज तो कहीं भारतीय संस्कृति के विविध रंगों की खूबसूरत छटा। कहीं नृत्य और संगीत के जरिए देश की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन तो कहीं उत्तराखंड की लोक पहचान की मनमोहक प्रस्तुति। विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति से सजे ‘संस्कार 2026’ समारोह में भारतीय संस्कृति के अनेक रंग एक ही मंच पर जीवंत हो उठे।
चिल्ड्रन्स एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गोपीपुरम की इकाई ‘ला इन्फैंसिया’ की ओर से शनिवार को कृष्ण स्वरूप मेमोरियल सभागार में ‘संस्कार 2026 : द कल्चरल कलीडोस्कोप’ का भव्य आयोजन किया गया। सप्त रंगों की थीम पर आधारित इस समारोह में विद्यार्थियों ने देश के विभिन्न राज्यों की सभ्यता, संस्कृति, लोक परंपराओं और विशिष्टताओं को आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि नैनीताल-उधमसिंह नगर के सांसद अजय भट्ट, विद्यालय निदेशक श्रीष पाठक, प्रधानाचार्या एवं अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यकारी निदेशक प्रियांशी पाठक ने अतिथियों और अभिभावकों का स्वागत करते हुए आयोजन की अवधारणा और उद्देश्य से परिचित कराया।
समारोह में ‘सप्त सुर, सप्त रंग’ की संकल्पना को आधार बनाकर विद्यार्थियों ने ‘वायलेट ऑर्किड’, ‘आलोर उत्सव’, ‘बैकवाटर बीट्स’, ‘रो, रो, रो योर बोट’, ‘मस्टर्ड मैजिक’, ‘सनसेट स्विर्ल’ और ‘बुरांश बहार’ जैसी प्रस्तुतियों के जरिए देश के अलग-अलग भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों की झलक पेश की। हर प्रस्तुति में भारतीय परंपराओं की विविधता के साथ विद्यार्थियों का आत्मविश्वास, अनुशासन और सामूहिक प्रयास नजर आया। समारोह की अंतिम प्रस्तुति ‘स्पिन द कलीडोस्कोप’ ने सप्त रंगों की मूल अवधारणा को खूबसूरती से साकार किया।
संस्कारों की पहली पाठशाला है परिवार : अजय भट्ट
मुख्य अतिथि सांसद अजय भट्ट ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बच्चों के जीवन में संस्कारों की पहली नींव परिवार में पड़ती है और माता-पिता ही उनकी पहली पाठशाला होते हैं। बच्चों को किताबी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देना भी जरूरी है, क्योंकि यही संस्कार उनके व्यक्तित्व और भविष्य की दिशा तय करते हैं।
उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर स्वस्थ, अनुशासित और संस्कारवान जीवन अपनाने का आह्वान किया। देवभूमि उत्तराखंड के इष्ट देवी-देवताओं, लोककथाओं और अपने जीवन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बच्चों और अभिभावकों को प्रेरक संदेश दिया। उनके संबोधन का उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ स्वागत किया।
प्रतिभा को मंच देना जरूरी : श्रीष पाठक
विद्यालय निदेशक श्रीष पाठक ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा और असीम संभावनाएं होती हैं। जरूरत है उन्हें सही अवसर और मंच उपलब्ध कराने की। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में शिक्षकों की मेहनत और अभिभावकों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर उच्च न्यायालय नैनीताल के अधिवक्ता मनोज साहनी, समाजसेवी हेमवती नंदन दुर्गापाल, पत्रकार बीसी भट्ट, प्रवीण रौतेला, कात्यायन रौतेला, अनिल जोशी, सत्यवीर त्यागी, आर्यन चौधरी, हरेंद्र असगोला, नीरज जोशी, पूजा बिष्ट, ग्राम प्रधान रुक्मणी नेगी, रिंपी बिष्ट और पवन पाठक को पौधे भेंटकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन तनु श्रीवास्तव और मानवी थापा ने किया। अंत में निदेशक श्रीष पाठक ने मुख्य अतिथि सांसद अजय भट्ट को स्मृति चिह्न भेंट किया। छात्रा आराध्या सैनी ने आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
