








भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता संपन्न, 99% भारतीय निर्यात को मिलेगा शून्य शुल्क लाभ!
नयी दिल्ली।
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने लगभग दो दशकों तक चली बातचीत के बाद मंगलवार को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने की घोषणा की। इसे भारत के अब तक के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। इस समझौते के लागू होने पर यूरोपीय संघ के 27 देशों में भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को बाजार पहुंच प्राप्त होगी।
अधिकारियों के अनुसार, परिधान, कपड़ा, रसायन, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, जूते-चप्पल, प्लास्टिक, रबर, रत्न एवं आभूषण, फर्नीचर, खिलौने और खेल सामग्री जैसे प्रमुख भारतीय क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा। वर्तमान में इन उत्पादों पर यूरोपीय संघ में शून्य से लेकर 26 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिखर स्तर की वार्ता के बाद इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझा समृद्धि की दिशा में एक नया खाका है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता मूल्य के आधार पर भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को बाजार पहुंच प्रदान करता है और भारत के वैश्विक व्यापार जुड़ाव में एक रणनीतिक सफलता है।
समझौते के तहत यूरोपीय संघ इसके लागू होने के पहले ही दिन भारत के लगभग 90 प्रतिशत सामानों पर आयात शुल्क समाप्त कर देगा। शेष वस्तुओं पर शुल्क को तीन से सात वर्षों की अवधि में चरणबद्ध रूप से खत्म किया जाएगा। कुल मिलाकर, यूरोपीय संघ भारत को व्यापार मूल्य के 99.5 प्रतिशत हिस्से पर रियायतें देगा।
दूसरी ओर, भारत भी यूरोपीय संघ को अपने बाजार में व्यापक पहुंच देगा। भारत समझौते के लागू होने के पहले दिन ईयू की लगभग 30 प्रतिशत वस्तुओं पर शुल्क हटाएगा, जबकि दस वर्षों की अवधि में यह आंकड़ा बढ़कर 93 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। कुल मिलाकर भारत यूरोपीय संघ को व्यापार मूल्य के 97.5 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क रियायतें देगा।
वाहन क्षेत्र में दोनों पक्षों ने कोटा आधारित शुल्क रियायतों पर सहमति जताई है। 25 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों के आयात की अनुमति नहीं दी जाएगी, जबकि उच्च मूल्य वर्ग की कारों के लिए सीमित कोटा निर्धारित किया गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए शुल्क रियायतें समझौते के पांचवें वर्ष से लागू होंगी।
सेवाओं के क्षेत्र में यूरोपीय संघ ने भारत को अब तक के सबसे उदार प्रस्तावों में से एक दिया है। इसके तहत 155 में से 144 उप-क्षेत्र खोले गए हैं। इसके अलावा छात्रों की आवाजाही और पढ़ाई के बाद कार्य वीजा से संबंधित प्रतिबद्धताएं भी शामिल हैं।
भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 25 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक-तिहाई प्रतिनिधित्व करते हैं। उम्मीद है कि इस समझौते पर वर्ष के अंत तक हस्ताक्षर हो जाएंगे और यह 2027 की शुरुआत में लागू होगा।
