








सिंचाई योजनाएं ध्वस्त, हजारों नाली खेती बंजर होने की कगार पर!
अल्मोड़ा के लिंगुड़ता और डूंगरलेख क्षेत्र के किसानों का फूटा गुस्सा, जिला पंचायत सदस्य ने डीएम से लगाई गुहार।
दर्पण न्यूज 24/7 अल्मोड़ा। जिला पंचायत सदस्य शैलजा चम्याल ने अल्मोड़ा जिले की ध्वस्त पड़ी सिंचाई योजनाओं को लेकर प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जिलाधिकारी अल्मोड़ा को ज्ञापन भेजकर ग्राम सभा लिगुड़ता और डॅगरलेख क्षेत्र की वर्षों से बंद पड़ी सिंचाई योजनाओं को तत्काल सुचारू कराने की मांग उठाई है।
जिला पंचायत सदस्य का कहना है कि क्षेत्र की कई सिंचाई योजनाएं लंबे समय से बंद पड़ी हैं, जिससे हजारों नाली उपजाऊ कृषि भूमि बंजर होने की स्थिति में पहुंच गई है। किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, लेकिन संबंधित विभाग लगातार बजट अभाव का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि विभाग की ओर से धरातल पर काम करने के बजाय केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। नदी किनारे बह चुकी और ध्वस्त योजनाओं के नाम पर टेंडर निकालकर सर्वे किए जा रहे हैं, जबकि वास्तविक मरम्मत और पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
शैलजा चम्याल ने बताया कि लिगुड़ता-मंगलता सिंचाई योजना की पाइप लाइन ध्वस्त होने से करीब 2000 से 3000 नाली भूमि प्रभावित है। वहीं रोयल-लिगुड़ता सिंचाई गुल के खराब होने से लगभग 700 से 800 नाली भूमि सिंचाई से वंचित हो गई है। इसके अलावा डॅगरलेख क्षेत्र की “पार की टानी” सिंचाई योजना भी ध्वस्त पड़ी है, जिससे करीब 500 नाली खेती प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते योजनाओं को पुनर्जीवित नहीं किया गया तो ग्रामीण क्षेत्रों में खेती पूरी तरह संकट में पड़ जाएगी और किसानों का पलायन और तेज होगा। उन्होंने प्रशासन से तत्काल बजट जारी कर योजनाओं की मरम्मत कराने की मांग की है।
क्षेत्रीय किसानों में भी विभागीय उदासीनता को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सिंचाई के अभाव में खेती करना मुश्किल हो गया है और सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं।
