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उत्तराखंड के खनन विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि!

डिजिटल खनन रूपांतरण प्रणाली और ई-रवन्ना सिक्योरिटी पेपर प्रोजेक्ट को ‘स्कॉच गोल्ड अवॉर्ड’ से सम्मान!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो देहरादून।
उत्तराखंड के खनन विभाग ने पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग के दो प्रमुख प्रोजेक्ट—एमडीटीएसएस (माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम) और ई-रवन्ना सिक्योरिटी पेपर—को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित ‘स्कॉच अवॉर्ड (गोल्ड)’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया।
समारोह में स्कॉच ग्रुप के चेयरमैन समीर कोचर ने यह पुरस्कार भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय, देहरादून के निदेशक राजपाल लेघा को प्रदान किया। इस उपलब्धि को राज्य के खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, निगरानी और राजस्व वृद्धि की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
राज्य सरकार द्वारा खनिज नीति और नियमावली को सरल बनाने के साथ तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा दिया गया है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में शुरू की गई इन योजनाओं के कारण अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। साथ ही वैध खनन को प्रोत्साहन मिलने से राज्य के राजस्व में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।
एमडीटीएसएस परियोजना के तहत राज्य के चार मैदानी जनपदों में 45 आधुनिक ई-चेक गेट स्थापित किए गए हैं। इन चेक गेट्स पर वेरिफोकल कैमरा, एएनपीआर कैमरा, आरएफआईडी टैग और एलईडी फ्लड लाइट जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा मिनरल मैनेजमेंट सिस्टम, ई-रवन्ना, मोबाइल एप, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS), वीटीएस और वेटब्रिज इंटीग्रेशन जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं, जिससे खनन गतिविधियों की निगरानी और अधिक सुदृढ़ हुई है।
वहीं, ई-रवन्ना सिक्योरिटी पेपर प्रणाली के तहत अब खनिज परिवहन के लिए विशेष सुरक्षा फीचर्स युक्त कागज पर ही प्रपत्र जारी किए जा रहे हैं। इससे फर्जीवाड़े और दस्तावेजों की नकल की संभावना लगभग समाप्त हो गई है।
इन दोनों परियोजनाओं के प्रभाव से न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगी है, बल्कि राज्य के खनन राजस्व में भी पिछले वर्षों की तुलना में लगभग चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
यह सम्मान उत्तराखंड के खनन क्षेत्र में सुशासन, तकनीकी नवाचार और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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