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धामी सरकार का बड़ा दांव: मदरसा बोर्ड खत्म, उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा का नया मॉडल लागू!

‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ की दिशा में बड़ा कदम, सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान शैक्षणिक अवसर देने का दावा!

दर्पण न्यूज 24/7 | देहरादून

उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में धामी सरकार ने बड़ा और दूरगामी फैसला लेते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को अपने शासकीय आवास में आयोजित कार्यक्रम में प्राधिकरण का विधिवत शुभारंभ किया और विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र वितरित किए। सरकार ने इसे शिक्षा में समान अवसर, पारदर्शिता और आधुनिकता की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह फैसला किसी समुदाय की पहचान या धार्मिक परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सभी अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि अब बच्चे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक और कौशल विकास जैसे आधुनिक विषयों से भी जुड़ सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पुस्तकें भेंट करते हुए कहा कि उत्तराखंड ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की भूमि है और राज्य सरकार इसे देश का आदर्श शिक्षा मॉडल बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, जागरूक और राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने वाले नागरिक तैयार करने का सबसे प्रभावी साधन है।

धामी ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर मिलेंगे। पहले जिन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता था, उन्हें भी अब बराबरी का अवसर मिलेगा। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था डिग्री तक सीमित नहीं, बल्कि कौशल, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और रोजगार से जुड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि शिक्षक प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया कि वे ऐसे विद्यार्थी तैयार करें जो ज्ञानवान, संस्कारित, संवेदनशील और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित हों।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, प्रदीप बत्रा, विधायक उमेश शर्मा काऊ, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते सहित विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु, शिक्षाविद और शिक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना धामी सरकार का ऐसा निर्णय माना जा रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होना तय है। सरकार इसे शिक्षा में समानता और आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा सुधार बता रही है, जबकि इस फैसले की राजनीतिक प्रतिक्रिया पर भी सभी की नजरें रहेंगी।

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