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अब इस जरूरतमंद का दर्द देख फिर पसीजा शुभम का दिल, जगाई जिंदगी की उम्मीद।
दोनों किडनियां खराब… मां बेटे को किडनी देने तैयार, 10 लाख के इलाज का खर्च बना पहाड़, 11 हजार की मदद देकर शुभम ने जगाई जिंदगी की उम्मीद।
हल्दूचौड़। किसी जरूरतमंद की आंखों में बेबसी देखकर सिर्फ अफसोस जताना आसान है, लेकिन उसके दर्द को अपना समझकर मदद के लिए आगे आना ही सच्ची इंसानियत है। 39 वर्षीय श्यामसुंदर जोशी आज जिंदगी के ऐसे ही कठिन दौर से गुजर रहे हैं। दोनों किडनियां खराब होने के बाद उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत है। मां अपने बेटे को नई जिंदगी देने के लिए अपनी किडनी देने को तैयार है, लेकिन करीब 10 लाख रुपये का इलाज गरीब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है।
परिवार की इस मजबूरी की जानकारी मिलने पर समाजसेवी शुभम अंडोला उनके घर पहुंचे। श्यामसुंदर की हालत और परिवार की आर्थिक स्थिति देखकर शुभम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए 11 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। यह रकम भले ही इलाज के खर्च के मुकाबले छोटी हो, लेकिन संकट में घिरे परिवार के लिए यह मदद सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि हिम्मत और उम्मीद का सहारा बनी। शुभम ने परिवार को भरोसा दिलाया कि श्यामसुंदर की जिंदगी बचाने की इस जंग में वे अकेले नहीं हैं और लोगों से भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करने की अपील की।
शुभम की पहल का असर यह हुआ कि धीरे-धीरे मदद के लिए दूसरे हाथ भी आगे आने लगे। पूर्व जिला पंचायत सदस्य कमलेश चंदोला और क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रतिनिधि नवल उपाध्याय ने पांच-पांच हजार रुपये की सहायता देकर पीड़ित परिवार का हौसला बढ़ाया। वहीं दिनेशपुर निवासी भुवन जोशी ने सोशल मीडिया ग्रुपों के माध्यम से लोगों से संपर्क कर दो लाख रुपये से अधिक की राशि जुटाने में सहयोग किया। कई लोग अपनी क्षमता के अनुसार 250, 500 और 1000 रुपये की छोटी-बड़ी धनराशि देकर इस मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं। लालकुआं तहसील के नोटरी अधिवक्ता गणेश कांडपाल भी इस सहायता अभियान में सहयोग के लिए आगे आए हैं।
इस पूरी मुहिम की सबसे खास बात यह है कि एक व्यक्ति की पहल धीरे-धीरे समाज की सामूहिक संवेदना में बदलती जा रही है। शुभम अंडोला ने मदद की शुरुआत खुद से की और फिर लोगों से अपील कर इस मुहिम को आगे बढ़ाया। उनकी दरियादिली का असर यह हुआ कि श्यामसुंदर की जिंदगी बचाने के लिए कई लोग अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करने के लिए आगे आए।
जरूरतमंदों के लिए शुभम अंडोला का यह समर्पण कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले गौलापार में हुए दर्दनाक हादसे के बाद भी उन्होंने पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे बढ़कर आर्थिक सहयोग किया था। इसके साथ ही उन्होंने समाज के लोगों से भी पीड़ित परिवार की सहायता के लिए अपील की, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग मदद के लिए आगे आए। अब श्यामसुंदर जोशी के इलाज के लिए शुरू हुई सहायता मुहिम ने एक बार फिर शुभम की सामाजिक संवेदनशीलता और दरियादिली को चर्चा में ला दिया है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि शुभम अंडोला की खासियत यह है कि वह केवल दुख जताने या संवेदना व्यक्त करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जरूरत की घड़ी में खुद आगे बढ़कर मदद करते हैं। उनका मानना है कि किसी जरूरतमंद की मदद के लिए बड़ी रकम से ज्यादा जरूरी बड़ा दिल होता है। यही सोच उन्हें समाजसेवा के क्षेत्र में अलग पहचान दिला रही है।
आज श्यामसुंदर के सामने जिंदगी बचाने की बड़ी चुनौती है। एक ओर मां अपने बेटे को बचाने के लिए अपनी किडनी देने को तैयार है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक तंगी इलाज की राह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। ऐसे समय में शुभम अंडोला की पहल ने परिवार के भीतर उम्मीद की एक नई किरण जगाई है। अब जरूरत है कि मदद का यह कारवां और बड़ा हो, ताकि आर्थिक मजबूरी किसी मां से उसके बेटे की जिंदगी न छीन सके।
श्यामसुंदर की जिंदगी बचाने की यह मुहिम सिर्फ आर्थिक मदद जुटाने की कोशिश नहीं, बल्कि इंसानियत की एक ऐसी मिसाल बनती जा रही है, जिसमें एक व्यक्ति ने आगे बढ़कर मदद का हाथ थामा और उसके बाद कई हाथ उस परिवार के सहारे के लिए जुड़ते चले गए। शुभम अंडोला की दरियादिली ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि मुसीबत में किसी का हाथ थाम लेना ही इंसानियत है और किसी की जिंदगी बचाने की कोशिश से बड़ा कोई धर्म नहीं।

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