

हल्दूचौड़ यूसीएफ में चल रहे ध्वस्तीकरण के मलबे पर अब लगा पहरा, पुराने हिसाब पर उठने लगे सवाल!
18 सितंबर से हर निकासी का रिकॉर्ड और संयुक्त सत्यापन अनिवार्य, आदेश ने पुरानी निकासी की निगरानी और जवाबदेही पर खड़े किए सवाल!
लालकुआं। हल्दूचौड़ स्थित उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) के सोयाबीन एवं वनस्पति कॉम्प्लेक्स में चल रहे ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे और स्क्रैप पर अब निगरानी कड़ी कर दी गई है। परियोजना प्रबंधक की ओर से 18 सितंबर को जारी आदेश में ध्वस्तीकरण स्थल से बाहर जाने वाली प्रत्येक सामग्री का रिकॉर्ड और संयुक्त सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इस नई व्यवस्था के साथ ही ध्वस्तीकरण की शुरुआत से 18 सितंबर तक बाहर गई सामग्री के रिकॉर्ड और उसकी निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
आदेश के मुताबिक ध्वस्तीकरण से प्राप्त मलबा, लोहा, ईंट, लकड़ी और अन्य उपयोगी अथवा स्क्रैप सामग्री बिना निर्धारित प्रक्रिया के बाहर नहीं ले जाई जाएगी। सामग्री का प्रकार, मात्रा अथवा संख्या, वाहन नंबर, चालक का नाम, तारीख और समय निर्धारित रजिस्टर में दर्ज करना होगा। इसके बाद अवर अभियंता और हरीश चंद्र कांडपाल के संयुक्त हस्ताक्षर से विवरण की पुष्टि होगी। संयुक्त हस्ताक्षर के बाद ही सामग्री को स्थल से बाहर ले जाने की अनुमति होगी।
मुख्य गेट पर तैनात कर्मचारी को प्रत्येक वाहन के आवागमन का रिकॉर्ड रखने और वाहन संख्या, चालक का नाम, सामग्री का विवरण, मात्रा, निर्गमन समय तथा संयुक्त हस्ताक्षर का मिलान करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर वाहन को बाहर नहीं जाने दिया जाएगा और तत्काल उच्चाधिकारी को सूचना देनी होगी। आदेश में सामग्री निकासी से संबंधित रजिस्टर और अन्य अभिलेख सुरक्षित रखने को भी कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका सत्यापन, निरीक्षण और लेखा परीक्षण किया जा सके।
आदेश में अवर अभियंता के साथ ही हरीश चंद्र कांडपाल और मुख्य गेट पर तैनात कर्मचारी को व्यवस्था के अनुपालन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
ऐसे में अब 18 सितंबर से लागू व्यवस्था ने ध्वस्तीकरण की शुरुआती अवधि के रिकॉर्ड को भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण बना दिया है। सवाल यह है कि ध्वस्तीकरण शुरू होने से 18 सितंबर तक कितनी सामग्री परिसर से बाहर गई? कितने वाहन बाहर निकले? किस वाहन से कौन-सी सामग्री गई? उसकी मात्रा किसने दर्ज की और गेट पर उसका सत्यापन किस स्तर पर हुआ?
आरबीएम की खुदाई और विद्युत पोलों को स्क्रैप में दिए जाने की शिकायतें पहले ही सामने आ चुकी हैं। इन शिकायतों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। ऐसे में पुराने गेट रजिस्टर, वाहन विवरण, स्क्रैप निस्तारण संबंधी अभिलेख और मौके की स्थिति का मिलान महत्वपूर्ण हो सकता है।
विद्युत पोलों से संबंधित शिकायत में पोलों की संख्या, उन्हें हटाने की अनुमति, स्क्रैप खरीदार और संबंधित वाहनों के रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है। वहीं आरबीएम के मामले में मौके पर हुई खुदाई, निकली सामग्री की मात्रा और उसके निस्तारण से जुड़े दस्तावेज अहम होंगे।
18 सितंबर का आदेश सामग्री की निकासी को लेकर एक स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है। अब मलबे से लेकर लोहे और अन्य स्क्रैप तक प्रत्येक सामग्री की पहचान, मात्रा, वाहन और निर्गमन समय दर्ज होगा। संयुक्त सत्यापन और गेट पर मिलान के बाद ही वाहन बाहर जा सकेगा।
लेकिन नई व्यवस्था के लागू होने से पहले हुई निकासी का हिसाब अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल बन गया है। यदि पुराने गेट रजिस्टर, वाहन रिकॉर्ड और निस्तारण संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं तो उनसे ध्वस्तीकरण के दौरान हुई निकासी का मिलान किया जा सकता है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि सामग्री की निकासी किस प्रक्रिया के तहत हुई।
मामले में शिकायतों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। ऐसे में 18 सितंबर का आदेश अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन उसने मलबे और स्क्रैप की निकासी को लेकर रिकॉर्ड, निगरानी और जिम्मेदारी का सवाल जरूर स्पष्ट कर दिया है।
अब अहम यह है कि नई व्यवस्था के तहत आगे की सामग्री का हिसाब तो दर्ज होगा ही, क्या ध्वस्तीकरण शुरू होने से 18 सितंबर तक बाहर गई सामग्री का हिसाब भी उसी गंभीरता से सामने लाया जाएगा? या पूर्व में पूर्ण पारदर्शिता से कार्य किया गया तो 18 सितंबर के इस आदेश की जरूरत क्यों आन पड़ी।
अब यह सवाल ही पूरे मामले में पुराने रिकॉर्ड की अहमियत बढ़ा रहे हैं।
