

ईडी के सवाल, रावत के जवाब और भट्ट का वार!
जीना प्रकरण में साढ़े छह घंटे पूछताछ के बाद बोले रावत—‘सत्ता का अहंकार’, भट्ट ने मां की तस्वीर को बताया ‘राजनीतिक प्रपंच’ !
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में शनिवार को जांच और राजनीति आमने-सामने दिखी। वर्ष 2016 की वीपीडीओ भर्ती परीक्षा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ईडी के सामने पेशी हुई। करीब साढ़े छह घंटे की पूछताछ के बाद रावत ने जांच को बदले की भावना और सत्ता के अहंकार से जोड़ दिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पलटवार करते हुए रावत के मां की तस्वीर गले में डालकर ईडी कार्यालय पहुंचने को सहानुभूति हासिल करने की कोशिश और ‘राजनीतिक प्रपंच’ बताया।
रावत शनिवार सुबह करीब 11 बजे अकेले ईडी कार्यालय पहुंचे। उनके गले में दिवंगत मां की तस्वीर थी। रावत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उन्होंने समर्थकों को साथ आने से मना किया है। पूछताछ के बाद उन्होंने कहा कि अंदर बातचीत सौहार्दपूर्ण रही और जांच अधिकारियों के सामने उन्होंने अपने पास मौजूद तथ्यों को रख दिया। साथ ही उन्होंने मौजूदा सरकारों पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इसे बदले की भावना बताया।
रावत की पेशी के साथ ही भाजपा ने राजनीतिक मोर्चा खोल दिया। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि यदि रावत ने कुछ गलत नहीं किया है तो जांच से डरने का सवाल ही नहीं है। उन्होंने मां की तस्वीर के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि सहानुभूति हासिल करने के लिए दिवंगत मां की तस्वीर को राजनीतिक हथियार बनाना उचित नहीं है।
भाजपा का तर्क है कि 2016 की वीपीडीओ भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब उन लोगों तक पहुंच रही है जो उस दौर की व्यवस्था से जुड़े थे। दूसरी ओर रावत का कहना है कि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध के तहत निशाना बनाया जा रहा है। यही विरोधाभास इस पूरे प्रकरण को महज जांच से आगे राजनीतिक बहस का मुद्दा बना रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि में 10 सितंबर को ईडी की चंदन सिंह जीना और उनसे जुड़े परिसरों पर हुई तलाशी है। ईडी के अनुसार तलाशी के दौरान करीब 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, सोना और 12 लग्जरी घड़ियां बरामद हुईं। संबंधित बैंक खातों में करीब 52.16 लाख रुपये फ्रीज किए गए और एजेंसी ने जब्त व फ्रीज संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 1.28 करोड़ रुपये बताया।
जांच एजेंसी वर्ष 2016 की यूकेएसएसएससी वीपीडीओ भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के साथ ओएमआर शीट से कथित छेड़छाड़, निजी कंप्यूटर एजेंसी से जुड़े लेनदेन और उससे संबंधित वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल कर रही है। चंदन सिंह जीना वर्ष 2014 से 2017 तक रावत के ओएसडी रहे और बाद में उनके निजी सहायक के तौर पर जुड़े रहे।
रावत ने जीना प्रकरण सामने आने के बाद जांच एजेंसियों के सामने अपना पक्ष रखने की इच्छा जताई थी। उन्होंने नौकरी या राजनीतिक पद के बदले धन लेने के आरोपों से भी इनकार किया है। लिहाजा अभी जांच के सवाल और राजनीतिक आरोप अलग-अलग स्तर पर हैं। जीना से जुड़ी कथित बरामदगी को सीधे रावत की व्यक्तिगत आपराधिक भूमिका का प्रमाण मानना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
यही इस प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू है। भाजपा इसे पुराने भर्ती प्रकरणों की जवाबदेही से जोड़ रही है, जबकि रावत इसे सत्ता के दुरुपयोग और राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण बता रहे हैं। एक तरफ ईडी की जांच आगे बढ़ रही है, दूसरी तरफ दोनों दलों के बीच आरोपों की राजनीतिक जंग तेज हो रही है।
आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा केवल बयानों से नहीं, बल्कि जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों और साक्ष्यों से तय होगी। सवाल यह है कि जीना प्रकरण की कथित वित्तीय कड़ियां आखिर कहां तक जाती हैं और जांच में किन-किन लोगों की भूमिका सामने आती है। फिलहाल ईडी के सवालों के बीच रावत के जवाब और भाजपा के पलटवार ने उत्तराखंड की सियासत में एक नया मोर्चा जरूर खोल दिया है।
