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हाईकोर्ट के बड़े फैसले: पाकिस्तानी सिख परिवार, टिहरी बांध, लोकायुक्त और गैंगरेप मामले में अहम निर्देश!

मंजूल चौनाल, विशेष संवाददाता

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों में अहम आदेश पारित किए गए। इनमें देहरादून में रह रहे पाकिस्तानी सिख परिवार का मामला, टिहरी बांध परियोजना से जुड़ी शर्तों के पालन का मुद्दा, लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया तथा उत्तरकाशी के चर्चित सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण शामिल रहे।

पाकिस्तानी सिख परिवार को राहत, सरकार से मांगा जवाब!

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने वर्ष 2019 से देहरादून में दीर्घकालिक वीजा पर रह रहे पाकिस्तानी सिख मंजीत सिंह और उनके परिवार को 24 घंटे के भीतर भारत छोड़ने के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित करते हुए तब तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया, जबकि याचिकाकर्ता ने वीजा अवधि अभी समाप्त न होने की दलील दी।

टिहरी बांध परियोजना पर सरकार से मांगा स्पष्टीकरण!

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने टिहरी बांध परियोजना की स्वीकृति से जुड़ी शर्तों के कथित उल्लंघन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से तीन सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि भागीरथी रिवर वैली मैनेजमेंट अथॉरिटी को पर्याप्त संसाधन और वित्तीय सहायता नहीं दी गई, जिससे उसका उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।

लोकायुक्त नियुक्ति पर प्रगति रिपोर्ट तलब!

हाईकोर्ट ने राज्य में लोकायुक्त और उसके सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सरकार से छह सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकायुक्त कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सरकार ने अदालत को बताया कि 4 जून को सर्च कमेटी का गठन किया जा चुका है।

उत्तरकाशी गैंगरेप केस में दोषियों की सजा बरकरार!

उत्तरकाशी के वर्ष 2017 के चर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट ने दोषी करार दिए गए अभियुक्तों मनीष अवस्थी, आशीष बिजल्वाण और अजय भट्ट की अपीलें खारिज कर दी हैं। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखा। खंडपीठ ने कहा कि पीड़िता का विश्वसनीय बयान अपने आप में महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है। वहीं राज्य सरकार की उस अपील को भी खारिज कर दिया गया, जिसमें एक अन्य आरोपी को बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी।

एक दिन में चार बड़े संदेश!

हाईकोर्ट के इन फैसलों ने स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका नागरिक अधिकारों, पर्यावरणीय जवाबदेही, भ्रष्टाचार निरोधक संस्थाओं की मजबूती और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर कठोर रुख बनाए हुए है। आने वाले सप्ताहों में इन मामलों की अगली सुनवाई राज्य की प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

— मंजूल चौनाल, विशेष संवाददाता, दर्पण न्यूज 24/7

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