मसूरी में सियासी घमासान: हरीश रावत ने भाजपा को बताया ‘रावण का वंशज’, मंत्री गणेश जोशी का पलटवार—‘बेरोजगार हैं, इसलिए मीडिया में बने रहने को कहीं भी बैठ जाते हैं’।
मसूरी।
मसूरी मालरोड पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तीखे बयान से उत्तराखंड की राजनीति में फिर उबाल आ गया। पत्रकारों से बातचीत में हरीश रावत ने भाजपा पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि “भाजपा के लोग रावण के वंशज हैं, जो अहंकार के साथ बात करते हैं। लोकतंत्र के देवता हमारे संघर्ष के साथ भी न्याय करें और इन्हें भी बेरोजगार बनाएं, जैसे आज हम बेरोजगार हैं।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य की अधिकांश प्राइम लैंड भाजपा और उसके शीर्ष नेतृत्व द्वारा बेची जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में उत्तराखंडियों के हाथ एक खोखला उत्तराखंड ही बचेगा।
हरीश रावत ने कहा कि बहुमूल्य जमीन गैर-उत्तराखंडियों को धड़ल्ले से बेची जा रही है।
मनरेगा के नाम को लेकर भी उन्होंने भाजपा सरकार पर साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा जानबूझकर महात्मा गांधी के नाम को मनरेगा से हटाना चाहती है, जबकि गांधी से बड़ा राम भक्त कोई नहीं था। “गांधी जी ने मरते समय भी ‘हे राम’ कहा था। भाजपा राम के नाम पर राजनीति कर रही है, लेकिन राम को सबसे छीनने का काम भी वही कर रही है।”
उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस इस कथित षड्यंत्र के खिलाफ देशभर में जनजागरण करेगी और सत्ता में आने पर महात्मा गांधी के नाम पर एक दर्जन योजनाएं शुरू की जाएंगी।
जोशी का तीखा पलटवार: ‘कोई काम नहीं, इसलिए बयानबाजी’
पूर्व सीएम के बयान पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि “हरीश रावत के पास कोई काम नहीं है। वह दिल्ली में भी और उत्तराखंड में भी बेरोजगार हैं।”
जोशी ने कहा कि इतना बड़ा नेता किसी बड़े मुद्दे पर बात करे, छोटे-छोटे मुद्दों पर कांग्रेस का कोई भी नेता बैठ सकता था।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “हरीश रावत को मीडिया में बने रहना है, इसलिए वह कहीं भी बैठ जाते हैं—कभी संतरे खाते हैं, कभी समोसे तलने लग जाते हैं। यह उनका स्वभाव है।”
पटरी व्यापारियों के मुद्दे पर मंत्री जोशी ने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा साफ है। “स्थानीय और जरूरतमंद बेरोजगारों का समायोजन हमारी जिम्मेदारी है। नगर निकाय चुनाव के घोषणा पत्र में वेंडरों के स्थायी समाधान का वादा किया गया है। जिनके पास आय के अन्य मजबूत स्रोत हैं, उन्हें चिन्हित नहीं किया गया है, जबकि जो वंचित रह गए हैं, उनका व्यवस्थित विस्थापन किया जाएगा।”
