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खनन क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव के नायक बने राजपाल लेखा: उत्तराखंड को दिलाया राष्ट्रीय सम्मान!

भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय की बड़ी उपलब्धि—पारदर्शिता, तकनीक और सख्ती से बदली पूरी व्यवस्था!
प्रमोद बमेटा ब्यूरो दर्पण न्यूज 24/7 देहरादून/नई दिल्ली।
कभी अवैध खनन और फर्जी प्रेषण-पत्रों के कारण सवालों में घिरा उत्तराखंड का खनन विभाग आज देश के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है। इस बड़े बदलाव के केंद्र में हैं भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय के निदेशक राजपाल लेखा, जिन्होंने अपनी कार्यशैली और सख्त निर्णयों से पूरे सिस्टम को नई दिशा दी।
राजपाल लेखा ने पदभार संभालते ही सबसे पहले व्यवस्था की उन कमजोर कड़ियों को पहचाना, जहाँ से अवैध खनन और गड़बड़ियों को बढ़ावा मिलता था। कागजी प्रक्रिया, ढीली निगरानी और जवाबदेही की कमी—ये तीन बड़ी समस्याएं थीं, जिन्हें सुधारने का निर्णय लिया गया।
इसके बाद “खनन डिजिटल रूपांतरण एवं निगरानी प्रणाली” लागू की गई। राज्य के चार मैदानी जिलों में 45 अत्याधुनिक जाँच द्वार स्थापित किए गए, जहाँ स्वचालित नंबर पहचान प्रणाली, रेडियो आवृत्ति पहचान टैग और उच्च क्षमता वाले कैमरों के जरिए खनिज वाहनों की चौबीसों घंटे निगरानी शुरू हुई। अब हर वाहन की गतिविधि रिकॉर्ड में है और किसी भी तरह की गड़बड़ी तुरंत पकड़ में आ जाती है।
खनिज परिवहन में फर्जी प्रेषण-पत्र सबसे बड़ी समस्या थी। इसे समाप्त करने के लिए विशेष सुरक्षा विशेषताओं वाले प्रेषण-पत्र लागू किए गए, जिन्हें डिजिटल प्रणाली से जोड़ा गया। इस कदम से नकली दस्तावेजों का खेल लगभग खत्म हो गया।
इसके साथ ही खनन विभाग ने एक व्यापक डिजिटल तंत्र विकसित किया, जिसमें खनिज प्रबंधन प्रणाली, ई-प्रेषण-पत्र, खनन ई-सेवाएँ, निगरानी एवं प्रवर्तन प्रणाली, मोबाइल अनुप्रयोग, निर्णय सहयोग प्रणाली और भार मापन केंद्रों का एकीकरण शामिल किया गया। इस एकीकृत व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गईं।
व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ सख्ती भी बढ़ाई गई। रुड़की क्षेत्र में अवैध खनन रोकने में विफल रहने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की गई, जबकि इकबालपुर चौकी का पूरा स्टाफ पहले ही निलंबित किया जा चुका है। इससे स्पष्ट संदेश गया कि अब लापरवाही या मिलीभगत के लिए कोई जगह नहीं है।
इन सुधारों का सीधा असर राज्य के राजस्व पर पड़ा है। अवैध खनन पर नियंत्रण और वैध खनन को बढ़ावा मिलने से आय में लगभग चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है। यह इस बात का प्रमाण है कि पारदर्शी व्यवस्था आर्थिक रूप से भी लाभदायक होती है।
इन उल्लेखनीय प्रयासों के परिणामस्वरूप 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उत्तराखंड खनन विभाग को प्रतिष्ठित स्कॉच स्वर्ण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान स्कॉच ग्रुप के अध्यक्ष समीर कोचर द्वारा राजपाल लेखा को प्रदान किया गया।
आज उत्तराखंड का खनन मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन चुका है। यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि नीति स्पष्ट हो, तकनीक का सही उपयोग हो और नेतृत्व मजबूत हो, तो किसी भी व्यवस्था में व्यापक सुधार संभव है।
इस परिवर्तन के केंद्र में रहे राजपाल लेखा ने यह सिद्ध कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और ईमानदार प्रयासों से किसी भी जटिल प्रणाली को बदला जा सकता है।

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