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डगर है मुश्किल… कठिन सफर है!

मंच पर सैनिक सम्मान, जमीन पर डेढ़ साल से भुगतान का इंतजार, जल जीवन मिशन के काम ने खोली सरकारी कार्यप्रणाली की पोल!

देहरादून। सैनिकों के सम्मान और उनके कल्याण की बातें मंच से जोर-शोर से होती हैं, लेकिन जमीन पर एक पूर्व सैनिक अपने किए काम का भुगतान पाने के लिए डेढ़ साल से इंतजार कर रहा है। जल जीवन मिशन के तहत काम पूरा करने वाले पूर्व सैनिक लालचंद कन्याल ने सैनिक सम्मेलन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के सामने अपनी समस्या रखी।

कन्याल के मुताबिक उन्होंने योजना के तहत काम पूरा किया, लेकिन करीब डेढ़ साल बाद भी भुगतान लंबित है। मामला अधिकारियों के स्तर पर उठाए जाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। सम्मेलन में शिकायत सुनने के बाद उन्हें समस्या के समाधान का भरोसा दिया गया।

मामला सरकार की कार्यप्रणाली के उस पहलू पर सवाल खड़ा करता है, जहां मंच पर सम्मान और योजनाओं की उपलब्धियां हैं, लेकिन जमीन पर काम करने वाले व्यक्ति को अपने भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। यदि भुगतान किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से रुका है तो उसका समयबद्ध समाधान भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

2027 की हैट्रिक के लक्ष्य के साथ सरकार सुशासन और विकास को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में सामने रख रही है। ऐसे में कन्याल का मामला कथनी और करनी के बीच की दूरी पर सवाल खड़ा करता है। अब मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद निगाह इस बात पर है कि डेढ़ साल से अटका भुगतान कब जारी होता है।

क्योंकि सरकार की असली परीक्षा मंच के दावों से नहीं, बल्कि जमीन पर आम आदमी को समय पर मिले उसके हक से होती है।

उत्तराखंड