

हादसों की सड़क, सवालों के घेरे में व्यवस्था!
लालकुआं से तीनपानी तक बार-बार दुर्घटनाएं, भारी वाहनों की आवाजाही पर उठ रहे सवाल!
हल्दूचौड़। लालकुआं से गौरापड़ाव-तीनपानी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-109 पर हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। दुर्घटना के बाद पुलिस-प्रशासन की सक्रियता दिखाई देती है, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पुराने ढर्रे पर लौट आती है। गुरुवार को हल्दूचौड़ में डंपर की चपेट में आकर 14 वर्षीय किशोरी की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह सवाल अब केवल एक हादसे तक सीमित नहीं है। क्या दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां स्थायी सुरक्षा उपाय किए गए हैं? क्या भारी वाहनों की गति और आवाजाही की प्रभावी निगरानी हो रही है? और क्या हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभागों के पास कोई ठोस कार्ययोजना है?
हादसे के बाद जागना कब तक?
स्थानीय लोगों के अनुसार बरेली रोड पर भारी वाहनों का दबाव लगातार बना रहता है। आबादी वाले हिस्सों, कट और चौराहों पर दोपहिया चालकों और पैदल राहगीरों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। लोगों का कहना है कि कार्रवाई तब दिखाई देती है जब हादसा हो जाता है, जबकि जरूरत ऐसी व्यवस्था की है जिससे हादसे की नौबत ही न आए।
राजनीतिक सक्रियता के बीच सड़क सुरक्षा का सवाल!
हल्दूचौड़ क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक गतिविधियों की सक्रियता के बावजूद सड़क सुरक्षा का मुद्दा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब सड़क हादसों की समस्या बार-बार सामने आ रही है तो संबंधित विभागों के बीच समन्वय कर स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा।
लोगों की मांग है कि लालकुआं से तीनपानी तक पूरे मार्ग का सड़क सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। दुर्घटना संभावित स्थानों को चिह्नित कर वहां गति नियंत्रण, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षित कट और भारी वाहनों की निगरानी जैसे उपाय लागू किए जाएं।
अब चाहिए हादसे से पहले की तैयारी!
हर हादसे के बाद जांच और कार्रवाई जरूरी है, लेकिन सड़क सुरक्षा की असली परीक्षा हादसे रोकने में है। लगातार दुर्घटनाओं वाले मार्ग पर केवल घटना के बाद की कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
एक किशोरी की मौत के बाद फिर वही सवाल सामने है—क्या व्यवस्था अगले हादसे का इंतजार करेगी, या लालकुआं से तीनपानी तक सड़क सुरक्षा को लेकर अब कोई स्थायी और समयबद्ध कदम उठाया जाएगा?
