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धुरंधर धामी के ‘गड्ढा मुक्त उत्तराखंड’ को सड़क के गड्ढों ने दिखाया आईना, 35 फीट गहराई में गिरकर युवक की मौत!

सड़क के गड्ढे ने छीनी 23 साल के जितेंद्र की जिंदगी, जिला अस्पताल की व्यवस्था पर भी उठे सवाल!

दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो

रुद्रपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के ‘गड्ढा मुक्त उत्तराखंड’ के दावों के बीच सड़क की बदहाली ने एक परिवार का चिराग बुझा दिया। रुद्रपुर क्षेत्र में सड़क पर बने खतरनाक गड्ढे और जर्जर मार्ग की कीमत 23 वर्षीय जितेंद्र को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। हादसे के बाद अस्पताल में इलाज को लेकर उठे सवालों ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल भी खोल दी।

ग्राम नंदपुर निवासी कल्याण सिंह का 23 वर्षीय पुत्र जितेंद्र अनहद ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री में काम करता था। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे वह सड़क पर बने गड्ढे और डिवाइडर की चपेट में आकर करीब 35 फीट गहरी खाई में जा गिरा। हादसे की सूचना मिलते ही अनहद ग्रुप के प्लांट हेड नरेश अरोड़ा अपने साथियों अमित चौधरी, साहब सिंह, सुखदेव आदि के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद घायल जितेंद्र को गहरी खाई से बाहर निकाला और जिला अस्पताल पहुंचाया।

लेकिन यहां कहानी और भी दर्दनाक हो गई। परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद घायल युवक को तत्काल उपचार नहीं मिल सका। अत्यधिक रक्तस्राव के बीच जितेंद्र की हालत लगातार बिगड़ती गई और करीब दस मिनट बाद उसने दम तोड़ दिया।

युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। माता-पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। समाजसेवी सुशील गाबा भी जिला अस्पताल पहुंचे और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।

एक मौत, कई सवाल

इस घटना ने सड़क निर्माण और रखरखाव से लेकर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली तक कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर सड़क पर इतना गहरा गड्ढा किसकी निगरानी में बना रहा? क्या संबंधित विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो समय रहते उसे भरा क्यों नहीं गया? और सबसे बड़ा सवाल—यदि सड़क की बदहाली ने हादसे को जन्म दिया, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

लोगों ने जिला अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज, इमरजेंसी रजिस्टर, चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी और घायल के उपचार से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अस्पताल पहुंचने के बाद युवक को समय पर उपचार मिला या नहीं।

बाजपुर समेत प्रदेश भर में बदहाल सड़कें  दे रहीं ‘गड्ढा मुक्त’ दावे को चुनौती

सड़क की बदहाली का मामला केवल रुद्रपुर,बाजपुर  तक सीमित नहीं है बल्कि समूचे राज्य में  कई प्रमुख मार्ग लंबे समय से गहरे गड्ढों और जर्जर सड़क से जूझ रहे हैं। बाजपुर में हुए हादसे के बाद भाजपा अनुसूचित मोर्चा के मंडल अध्यक्ष एडवोकेट सूरज सागर ने इस संबंध में उप जिलाधिकारी ऋचा सिंह को पत्र भेजकर सड़कों की मरम्मत की मांग की है।

यहां भगत सिंह चौक, मुख्य सड़क, रेलवे क्रॉसिंग, मुंडिया रोड, सिंचाई विभाग गेस्ट हाउस रोड, मरियमपुर रोड और दोराहा रोड समेत कई मार्गों पर जगह-जगह सड़क उखड़ी हुई है और गहरे गड्ढे बने हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। दोपहिया वाहन चालकों के असंतुलित होकर गिरने और चोटिल होने का खतरा लगातार बना हुआ है।

कागजों में गड्ढा मुक्त, जमीन पर मौत के गड्ढे

सरकारें सड़क सुधार और गड्ढा मुक्त अभियान के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन रुद्रपुर में जितेंद्र की मौत और बाजपुर की सड़कों की तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है।

जब सड़क का गड्ढा 35 फीट गहरी मौत की खाई बन जाए, तो सवाल सिर्फ सड़क की मरम्मत का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जवाबदेही का भी है। अब देखना यह है कि जितेंद्र की मौत के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग जागता है या फिर अगली दुर्घटना का इंतजार किया जाता है।

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