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आस्था और संगम का माह है सावन, शिवभक्ति में डूबा जनमानस!

पार्थिव पूजन से लेकर जलाभिषेक तक, हर ओर गूंज रहा हर-हर महादेव!

प्रमोद बमेटा

हल्दूचौड़। सावन का महीना आते ही वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर हो उठता है। शिवालयों में गूंजता हर-हर महादेव का जयघोष, मंदिरों में जलाभिषेक के लिए उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ और घर-घर में होने वाली शिव आराधना सावन को विशेष बना देती है। यह महीना केवल भगवान शिव की उपासना का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और आध्यात्मिकता के संगम का भी प्रतीक माना जाता है।

सावन में भगवान शिव को जल, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर श्रद्धालु सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। वहीं पार्थिव शिवलिंग पूजन की भी विशेष परंपरा है। श्रद्धालु पवित्र मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना और अभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और संकल्प के साथ पार्थिव पूजन करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।

पार्थिव पूजन की विशेषता इसकी सहजता में भी है। मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण कर भगवान शिव की आराधना करना प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव भी दर्शाता है। पूजा के बाद पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन जीवन के उस सत्य का प्रतीक माना जाता है कि सृष्टि प्रकृति से उत्पन्न होकर अंततः उसी में विलीन हो जाती है।

सावन के दौरान शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है। महिलाएं, पुरुष और युवा भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। वातावरण में गूंजते मंत्र और भजनों के बीच सावन का रंग हर किसी को शिवभक्ति से जोड़ देता है।

सावन इसलिए सिर्फ एक महीना नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम, प्रकृति और शिवत्व से जुड़ने का अवसर है। यही आस्था इस पावन माह को विशेष बनाती है। हर-हर महादेव!

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