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नैनी झील में खूंखार मछलियों का खतरा, जैव विविधता बचाने को शुरू हुआ विशेष अभियान!
धर्मेंद्र शर्मा दर्पण न्यूज 24/7 | नैनीताल
उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील की जैव विविधता पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए प्रशासन और वैज्ञानिकों ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। झील में पाई जा रही छोटी मछलियों को खाने वाली आक्रामक प्रजातियों को निकालने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन खतरनाक मछलियों को समय रहते नहीं हटाया गया तो झील का प्राकृतिक संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
झील में पाई गई आक्रामक मछलियां
जानकारी के अनुसार झील में मंगूर मछली और बड़े सिर वाली कैटफिश (बिल्ली मछली) जैसी खतरनाक प्रजातियां पाई गई हैं। ये मछलियां बेहद आक्रामक और मांसाहारी होती हैं और झील में मौजूद छोटी मछलियों तथा अन्य जलीय जीवों को तेजी से खत्म कर देती हैं।
इसके अलावा बड़े सिर वाली कार्प मछली झील में मौजूद सूक्ष्म जलीय जीवों (प्लवक) को बड़ी मात्रा में खा जाती है। ये प्लवक झील के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं और कई छोटी मछलियां तथा जलीय जीव इन्हीं पर निर्भर रहते हैं।
वैज्ञानिकों ने जताई चिंता
गोविंद बल्लभ पंत विश्वविद्यालय के मत्स्य विज्ञान विभाग के प्रोफेसर आशुतोष मिश्रा ने बताया कि नैनी झील का पारिस्थितिकी तंत्र अभी संतुलित और समृद्ध है, लेकिन आक्रामक प्रजातियां बढ़ने पर यह संतुलन बिगड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि झील की जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर जैविक प्रतिस्थापन प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके तहत उन मछलियों को झील से हटाया जाता है जो स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए हानिकारक होती हैं। इनमें सामान्य कार्प, बड़े सिर वाली कार्प और विदेशी मंगूर जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
धार्मिक आस्था के कारण भी छोड़ी जाती हैं मछलियां
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार लोग धार्मिक मान्यताओं के कारण झील में मछलियां छोड़ देते हैं। इनमें कुछ आक्रामक प्रजातियां भी होती हैं, जो बाद में झील के प्राकृतिक संतुलन के लिए खतरा बन जाती हैं।
विशेष जाल से पकड़ी जा रही मछलियां
इन खतरनाक मछलियों को पकड़ने के लिए झील में गलफड़ा जाल, आड़ा जाल और छोटी मछलियों को पकड़ने वाले जाल लगाए जा रहे हैं। इनकी मदद से वैज्ञानिक आक्रामक मछलियों की पहचान कर उन्हें झील से बाहर निकाल रहे हैं।
मंगूर मछली सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार थाई मंगूर मछली बेहद खतरनाक होती है। यह मांसाहारी होने के कारण छोटी मछलियों को तुरंत अपना शिकार बना लेती है। यदि इसकी संख्या बढ़ गई तो झील की स्थानीय मछलियों की संख्या तेजी से घट सकती है।
लगातार होगी निगरानी
वैज्ञानिकों का कहना है कि नैनी झील की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने के लिए भविष्य में भी नियमित निगरानी और जांच अभियान जारी रहेगा, ताकि कोई भी आक्रामक प्रजाति झील के पर्यावरण को नुकसान न पहुंचा सके।
पर्यटन की पहचान बनी नैनी झील को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन और वैज्ञानिकों का यह अभियान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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