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आठ महीने से कोख में पल रही थी दर्द की दास्तां! मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती से दुष्कर्म का आरोप, मानवता फिर हुई शर्मसार!

सड़कों पर भटकती रही 25 वर्षीय युवती, किसी को नहीं दिखी उसकी पीड़ा… पेट दर्द से तड़पी तो सामने आया आठ माह की गर्भावस्था का सच!

रामनगर। वह बोलने-समझने की स्थिति में कितनी सक्षम थी, अपनी पीड़ा किसे सुनाती और मदद के लिए किसके दरवाजे जाती? मानसिक रूप से अस्वस्थ 25 वर्षीय युवती की जिंदगी की यह दर्दनाक कहानी समाज की संवेदनाओं को झकझोर देने वाली है। आरोप है कि उसके साथ दरिंदगी की गई और वह आठ माह तक गर्भ में उस पीड़ा का बोझ लिए सड़कों पर भटकती रही। जब पेट दर्द से तड़पती हालत में मिली, तब उसकी गर्भावस्था का पता चला।

मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली यह युवती पिछले आठ-नौ महीनों से रामनगर और आसपास के क्षेत्रों में घूमती दिखाई दे रही थी। काशीपुर रोडवेज बस अड्डे के पास दर्द से परेशान युवती पर एक व्यक्ति की नजर पड़ी तो उसने सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश सुयाल को सूचना दी। मुकेश अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और उसे अस्पताल पहुंचाया। जांच में युवती के करीब आठ माह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उसे बेहतर उपचार के लिए हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश सुयाल के मुताबिक, बातचीत के दौरान युवती ने बताया कि होली के आसपास रामनगर क्षेत्र में दो-तीन लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। हालांकि, युवती की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसके बयान और आरोपों की संवेदनशीलता के साथ पुष्टि किया जाना जरूरी है।

सड़क पर भटकती रही, क्या किसी ने उसकी खामोशी पढ़ने की कोशिश की?

यह घटना सिर्फ कथित दुष्कर्म का मामला नहीं, बल्कि उन असहाय महिलाओं की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल है, जिनके पास अपनी पीड़ा बयान करने, मदद मांगने और अपने लिए न्याय की लड़ाई लड़ने के पर्याप्त साधन तक नहीं होते। आखिर इतने महीनों तक युवती आसपास के इलाकों में भटकती रही तो उसकी सुध लेने वाला कोई क्यों नहीं था? क्या हमारी सामाजिक संवेदनाएं इतनी कमजोर हो गई हैं कि किसी की बेबसी भी हमें दिखाई नहीं देती?

चिंता इसलिए भी गहरी है क्योंकि रामनगर में कुछ वर्ष पहले भी मानसिक रूप से अस्वस्थ एक महिला के साथ इसी तरह की घटना सामने आने की बात कही जा रही है। उस महिला ने बाद में बच्चे को जन्म दिया था।

अब सिर्फ जांच नहीं, युवती को संरक्षण और न्याय भी चाहिए!

रामनगर कोतवाल सुशील कुमार के अनुसार, मामला संज्ञान में है। पुलिस गंभीरता से जांच कर रही है और महिला सेल को भी नियमानुसार जानकारी दी जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल है कि क्या इस बार जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या युवती को न्याय भी मिलेगा? उसे सुरक्षित आश्रय, बेहतर इलाज और आगे के जीवन के लिए संरक्षण कौन देगा?

उसकी खामोशी को उसकी सहमति न समझा जाए। उसकी बेबसी को उसकी नियति न बनने दिया जाए। यह सिर्फ एक युवती की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता और व्यवस्था की जिम्मेदारी की परीक्षा है।

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