सरकारी स्कूल में पढ़ाई छोड़ बच्चों के हाथों में थमा दी झाड़ू!
हिम्मतपुर चौमवाल जूनियर हाईस्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल,
शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल।
हल्द्वानी। उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने और नौनिहालों को बेहतर शैक्षिक माहौल देने के सरकारी दावों के बीच विकासखंड हल्द्वानी के हिम्मतपुर चौमवाल स्थित जूनियर हाईस्कूल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। वीडियो में स्कूली बच्चे कथित तौर पर विद्यालय परिसर में झाड़ू लगाते और सफाई करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी विद्यालयों की व्यवस्थाओं और जिम्मेदार शिक्षकों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि सुबह-सुबह स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को पढ़ाई कराने के बजाय उनसे झाड़ू लगवाई जा रही है और कूड़ा उठवाया जा रहा है। वीडियो में कुछ बच्चे हाथों में झाड़ू और बाल्टी लिए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन बच्चों के हाथों में किताब-कॉपी और कलम होनी चाहिए, यदि उन्हीं हाथों में झाड़ू और बाल्टी थमा दी जाए तो फिर सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों का क्या मतलब रह जाता है? विद्यालयों में साफ-सफाई की व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसके लिए बच्चों से नियमित रूप से सफाई करवाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता।
वायरल वीडियो ने अभिभावकों और स्थानीय लोगों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। लोगों का कहना है कि सरकार लगातार सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करती रही है। ऐसे में यदि किसी विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई के समय सफाई के काम में लगाया जा रहा है तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा घटनाक्रम सही है तो जिम्मेदार अधिकारियों को मामले का तत्काल संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि बच्चों से किस परिस्थिति में सफाई कराई गई और क्या इसके लिए किसी शिक्षक या विद्यालय प्रबंधन की ओर से निर्देश दिए गए थे।
लालकुआं विधानसभा क्षेत्र से जुड़े इस मामले ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष पड़ताल की जाए और यदि बच्चों से अनुचित तरीके से सफाई कार्य कराया जाना प्रमाणित होता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बच्चे देश का भविष्य हैं। उनके हाथों में झाड़ू नहीं, किताब और कलम होनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो पर शिक्षा विभाग और प्रशासन कब तक संज्ञान लेते हैं और इस पूरे मामले की सच्चाई सामने कब आती है।
