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जनसेवा के संकल्प से रखी गई नींव, आज भी अधूरी है हल्दूचौड़ सीएचसी की कहानी!

हरीश चंद्र दुर्गापाल के कार्यकाल में देखे गए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के सपने को अब तक नहीं मिल पाया मुकाम, विशेषज्ञ डॉक्टर और जांच सुविधाओं की दरकार!

दर्पण न्यूज 24/7हल्दूचौड़:

बरेली रोड और लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के लिए कभी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की उम्मीद बनी हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  आज भी कई जरूरी सेवाओं के विस्तार का इंतजार कर रहा है। जिस सोच के साथ पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल के कार्यकाल में इसकी आधारशिला रखी गई थी, उसका मकसद यही था कि स्थानीय लोगों को इलाज के लिए अब हल्द्वानी और अन्य शहरों का रुख न करना पड़े। लेकिन वर्षों बाद भी यह उम्मीद पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर सकी है।

क्षेत्र की आबादी बढ़ी, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें बढ़ीं और राजनीतिक नेतृत्व भी बदला, लेकिन सीएचसी की सेवाओं का विस्तार अपेक्षित गति से नहीं हो पाया। आज भी कई मरीजों को सामान्य उपचार के बाद आवश्यक जांच या विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श के लिए हल्द्वानी या अन्य शहरों को जाना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भूमिका केवल प्राथमिक उपचार तक सीमित रहनी चाहिए?

सीएचसी की आधारशिला के बाद क्षेत्र की राजनीति में भी बदलाव आया। वर्ष 2017 में जनता ने नवीन दुमका को अपना प्रतिनिधि चुना। इसी अवधि में कोविड महामारी जैसी अभूतपूर्व चुनौती सामने आई, जिसका असर स्वास्थ्य व्यवस्था और विकास कार्यों पर पड़ा।

वर्ष 2022 से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में क्षेत्र के विकास को लेकर तमाम दावे किए तो जा रहे  हैं, किन्तु  हल्दूचौड़ सीएचसी को लेकर स्थानीय लोगों की अपेक्षाएं पूरी तरह पूरी नहीं हुई हैं।

यही वजह है कि अब यह मुद्दा किसी एक सरकार या दल की आलोचना से आगे बढ़कर लगातार बदलते राजनीतिक नेतृत्व की सामूहिक जवाबदेही का सवाल बन गया है।

2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री दीपेंद्र कोश्यारी सहित कई राजनीतिक चेहरे क्षेत्र में सक्रिय हैं। अलग-अलग दलों के नेता जनसमस्याओं को लेकर अपनी सक्रियता भी दिखाते हैं।

ऐसे माहौल में जनता के सामने यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या हल्दूचौड़ सीएचसी को मजबूत करना भी राजनीतिक एजेंडे का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा, जितना सड़क, बिजली, पानी और अन्य विकास कार्य?

क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांग है कि सीएचसी में आवश्यक जांच और चिकित्सकीय सेवाओं का विस्तार किया जाए। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, गायनी जैसी सेवाओं के साथ पर्याप्त डॉक्टर, तकनीकी कर्मचारी और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध हो, ताकि मरीजों को छोटी-छोटी जांच के लिए भी हल्द्वानी न जाना पड़े।

विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं। निजी अस्पतालों का खर्च हर परिवार के लिए संभव नहीं होता, जबकि दूर के अस्पताल तक पहुंचना समय और संसाधन दोनों मांगता है।

उनका साफ कहना है कि किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की सफलता केवल उसके भवन से नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध सेवाओं से तय होती है। कितने डॉक्टर उपलब्ध हैं, कौन-कौन सी जांच होती हैं, विशेषज्ञ चिकित्सक कितनी नियमितता से उपलब्ध हैं और गंभीर मरीजों को किस स्तर तक उपचार मिल सकता है—यही उसकी वास्तविक उपयोगिता तय करते हैं,हल्दूचौड़ सीएचसी के मामले में भी अब जरूरत केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि स्पष्ट कार्ययोजना और समयबद्ध क्रियान्वयन की है।

हरीश चंद्र दुर्गापाल के कार्यकाल में जिस उम्मीद के साथ सीएचसी की नींव रखी गई थी, वह उम्मीद आज भी क्षेत्र की जनता के मन में है। इसके बाद कई जनप्रतिनिधि आए और क्षेत्र की जनता ने उन्हें अपना विश्वास दिया,किंतु अब सवाल किसी एक नेता से नहीं, हर उस जनप्रतिनिधि और राजनीतिक नेतृत्व से है जो हल्दूचौड़ की जनता के बीच जनसेवा का संकल्प लेकर आता है।

क्या सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सक और जरूरी स्टाफ उपलब्ध होंगे? क्या एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी आवश्यक जांच सुविधाएं नियमित होंगी? क्या गायनी सहित जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा? और क्या हल्दूचौड़ के मरीज को सामान्य इलाज के लिए भी हल्द्वानी की दौड़ से राहत मिलेगी?

इन सवालों का जवाब केवल चुनावी मंच से नहीं, सीएचसी में उपलब्ध सुविधाओं के रूप में जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

हल्दूचौड़ की जनता की अपेक्षा सीधी है—जिस स्वास्थ्य केंद्र की नींव जनसेवा के संकल्प के साथ रखी गई थी, वह अब अपनी पूरी क्षमता के साथ जनता की सेवा करे।

उत्तराखंड