








व्यासपीठ से गूंजे भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के अमृत वचन!
दर्पण न्यूज 24/7 हल्दूचौड़!
हरिपुर भानदेव स्थित कालिका मंदिर परिसर में गणेश दत्त बमेटा के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा माहात्म्य के दौरान व्यासाचार्य नमन कृष्ण महाराज के मुखमंडल से निकले उद्गारों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कथा के दौरान उन्होंने सरल और भावपूर्ण शब्दों में श्रीमद्भागवत का सार प्रस्तुत करते हुए जीवन का सच्चा उद्देश्य समझाया।
व्यासाचार्य ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का मूल तत्व ‘भक्ति, ज्ञान और वैराग्य’ है, जो जीव को परमात्मा से जोड़कर जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त करता है। उन्होंने राजा परीक्षित के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि मृत्यु अटल सत्य है, इसलिए मनुष्य को समय रहते सांसारिक मोह-माया का त्याग कर भगवान की शरण ग्रहण करनी चाहिए।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भागवत में भक्ति को सर्वोपरि स्थान दिया गया है। निष्काम भाव से की गई भक्ति ही सच्ची साधना है और प्रेम ही वह शक्ति है, जो मनुष्य को ईश्वर के समीप ले जाती है।
कथा में भगवान विष्णु के 24 अवतारों और विशेष रूप से श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए व्यासाचार्य ने कहा कि इन प्रसंगों के माध्यम से भक्त हर परिस्थिति में ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव कर सकता है।
उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और कलयुग में यह मुक्ति का सरलतम मार्ग है। साथ ही, यह कथा केवल मोक्ष का मार्ग नहीं दिखाती, बल्कि वर्तमान जीवन में धर्म, कर्म और कर्तव्य के बीच संतुलन बनाकर जीने की कला भी सिखाती है।
व्यासाचार्य नमन कृष्ण महाराज ने अंत में कहा कि मनुष्य को अपने अहंकार का त्याग कर संसार में रहते हुए भी अपना मन परमात्मा में लगाना चाहिए, यही जीवन की सार्थकता है।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने भक्ति भाव से कथा का रसपान कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
