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“जिसके नाम पर अस्पताल, उसकी जयंती भी भूला तंत्र”

पंडित हरगोविंद पंत की प्रतिमा दोपहर तक रही उपेक्षित, बाद में शिक्षाविद ने पहुंचकर किया माल्यार्पण!

दर्पण न्यूज 24/7 अल्मोड़ा। उत्तराखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद एवं समाज सुधारक पंडित हरगोविंद पंत की जयंती पर मंगलवार को अल्मोड़ा में प्रशासनिक उदासीनता का मामला सामने आया। विडंबना यह रही कि जिस महापुरुष के नाम पर जिला चिकित्सालय संचालित है, उसी विभूति की प्रतिमा सुबह से बिना माल्यार्पण के उपेक्षित खड़ी रही, लेकिन न जिला प्रशासन और न ही चिकित्सा प्रबंधन ने उन्हें श्रद्धांजलि देना जरूरी समझा।

स्थानीय लोगों में इसको लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना था कि जिन महापुरुषों ने अपना पूरा जीवन समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया, आज उन्हें याद करना भी व्यवस्था की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं रह गया है। हैरानी की बात यह भी रही कि सामाजिक आयोजनों में सक्रिय दिखाई देने वाले उनके परिजनों की ओर से भी जयंती पर कोई उपस्थिति दर्ज नहीं हुई।

सुबह से उपेक्षित पड़ी प्रतिमा पर दोपहर बाद अल्मोड़ा इंटर कॉलेज के प्रबंधक एवं वरिष्ठ शिक्षाविद सुशील कुमार जोशी स्वयं माला लेकर जिला चिकित्सालय पहुंचे। उनके आग्रह पर अस्पताल स्टाफ द्वारा पंडित हरगोविंद पंत की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इस दौरान मनमोहन बोरा, सुरक्षा अधिकारी हरीश सिंह बिष्ट तथा सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांडे भी मौजूद रहे।

स्थानीय नागरिकों ने इसे जिले के स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति लगातार बढ़ती उपेक्षा का उदाहरण बताया। लोगों ने कहा कि इससे पहले भी प्रशासन एवं चिकित्सा प्रबंधन स्वतंत्रता सेनानी विक्टर मोहन जोशी की जयंती को भूल चुका है। उस समय भी सुशील कुमार जोशी ने आगे बढ़कर श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

बताया जाता है कि पंडित हरगोविंद पंत का जन्म 19 मई 1885 को अल्मोड़ा जनपद के चितई गांव में हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अल्मोड़ा में वकालत शुरू की, लेकिन उनका जीवन केवल पेशे तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने “सोशल सर्विस लीग” की स्थापना कर शिक्षा, स्वच्छता और जनजागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ ही उन्होंने छुआछूत, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी लगातार संघर्ष किया।

आज भी पंडित हरगोविंद पंत का जीवन समाज सेवा, राष्ट्रभक्ति और जनकल्याण की प्रेरणा देता है, लेकिन उनकी जयंती पर दिखाई गई प्रशासनिक बेरुखी ने व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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