15 जून को बाबा के दरबार में लगेगा ऐतिहासिक मेला, चमत्कारों और आस्था का अद्भुत संगम है बाबा की यह तपस्थली।
प्रमोद बमेटा ब्यूरोचीफ दर्पण न्यूज 24/7
भीमताल। उत्तराखंड की सुरम्य वादियों में स्थित विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। हर वर्ष 15 जून को बाबा नीब करौली महाराज के स्थापना दिवस पर यहां लगने वाला मेला देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का साक्षी बनता है। इस वर्ष भी बाबा के दरबार में ऐतिहासिक मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और पूरा धाम दुल्हन की तरह सज चुका है।
बाबा नीब करौली महाराज को उनके भक्त हनुमान जी का अवतार मानते हैं। उनके जीवन से जुड़े अनेक चमत्कार आज भी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा और आस्था का विषय बने हुए हैं। इन्हीं में से एक प्रसिद्ध घटना कैंची धाम के भंडारे से जुड़ी है। मान्यता है कि एक बार विशाल भंडारे के दौरान घी समाप्त हो गया। तब बाबा ने सेवकों को पास की नदी से पानी भरकर लाने का निर्देश दिया। जब उस पानी का उपयोग प्रसाद बनाने में किया गया तो वह घी में परिवर्तित हो गया और भंडारा निर्विघ्न संपन्न हुआ। श्रद्धालु इस घटना को बाबा की दिव्य शक्ति का प्रतीक मानते हैं।
बाबा के जीवन से जुड़ी एक और चर्चित कथा रेलवे से संबंधित है। कहा जाता है कि एक बार टिकट न होने के कारण उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया था। बाबा एक नीम के पेड़ के नीचे जाकर बैठ गए। इसके बाद लाख प्रयासों के बावजूद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। जब रेलवे अधिकारियों ने बाबा से क्षमा मांगकर उन्हें सम्मानपूर्वक ट्रेन में बैठाया, तभी ट्रेन चल सकी। यह घटना बाबा के चमत्कारों की सबसे प्रसिद्ध कहानियों में से एक मानी जाती है।
बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। उनका जन्म वर्ष 1900 में उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में हुआ था। कहा जाता है कि किशोरावस्था में ही उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी। वर्ष 1958 में उन्होंने गृहस्थ जीवन त्यागकर जनसेवा और आध्यात्मिक साधना का मार्ग अपनाया। उन्होंने देशभर में अनेक हनुमान मंदिरों और आश्रमों की स्थापना की, जिनमें कैंची धाम और वृंदावन आश्रम विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
कैंची धाम के स्थापना दिवस पर वितरित होने वाला मालपुए का प्रसाद भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि बाबा को मालपुए अत्यंत प्रिय थे और उनकी इच्छा से ही यह परंपरा शुरू हुई। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस प्रसाद को बाबा के आशीर्वाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
स्थापना दिवस को लेकर पूरा कैंची धाम विद्युत झालरों, रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक सजावट से जगमगा उठा है। मंदिर परिसर से लेकर मुख्य मार्ग तक विशेष सजावट की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सफाई, पेयजल और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। देश के विभिन्न राज्यों से कारसेवकों और भक्तों का आगमन लगातार जारी है।
15 जून को आयोजित होने वाला यह ऐतिहासिक मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बाबा नीब करौली महाराज की जीवंत विरासत, उनके चमत्कारों और मानवता के प्रति उनके संदेश का उत्सव है। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बाबा के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।
