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अमेरिका-ईरान शांति समझौते की ओर बढ़े कदम, परमाणु कार्यक्रम सीमित रखने और प्रतिबंधों में राहत पर बनी सहमति।

दर्पण न्यूज 24/7 | नई दिल्ली

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते (एमओयू) के मसौदे में परमाणु कार्यक्रम, तेल प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज संपत्तियों की रिहाई और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सहमति बनने की खबर है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही किसी अन्य देश से प्राप्त करेगा। प्रस्तावित मसौदे के तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति बनाए रखेगा तथा यूरेनियम संवर्धन और नए परमाणु केंद्रों के विस्तार को आगे नहीं बढ़ाएगा। इसके लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की गई है, जिसके दौरान दोनों पक्ष विस्तृत वार्ता कर अंतिम समझौते का प्रारूप तैयार करेंगे।

समझौते के मसौदे के अनुसार हस्ताक्षर होते ही ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी देशों के वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोल देगा। इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लागू नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा, जिसे 30 दिनों के भीतर पूरा किए जाने का प्रस्ताव है।

वित्तीय मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण राहत का प्रावधान किया गया है। अंतिम समझौता होने तक अमेरिका ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा। वहीं अंतिम समझौते के बाद अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध चरणबद्ध तरीके से हटाए जा सकते हैं। अमेरिका सीमित अवधि के लिए ईरानी तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में छूट देने पर भी सहमत बताया जा रहा है, जिससे ईरान को तेल बिक्री से राजस्व प्राप्त हो सकेगा।

रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका ईरान की लगभग 25 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियां और धनराशि जारी करने पर भी विचार कर रहा है। यह राशि प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण, क्षेत्रीय सहयोग और वित्तीय क्रेडिट लाइन के माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके अलावा अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए एक व्यापक योजना तैयार करने पर भी चर्चा करेंगे।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते पर जल्द हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई है। हालांकि ईरान ने कहा है कि उसके विशेषज्ञ और नीति-निर्धारक मसौदे के राजनीतिक, कानूनी और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा कर रहे हैं और अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

समझौते को अंतिम रूप दिलाने के प्रयासों के तहत कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा है। यह दल दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

दूसरी ओर, ईरान के भीतर इस समझौते का विरोध भी तेज होता दिखाई दे रहा है। कट्टरपंथी समूहों और कुछ रूढ़िवादी नेताओं का मानना है कि यह समझौता ईरान के हितों से समझौता करने जैसा होगा। तेहरान और मशहद सहित कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जहां प्रदर्शनकारियों ने समझौते के खिलाफ नारेबाजी की।

फिलहाल दोनों देशों की ओर से अंतिम स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। यदि यह समझौता लागू होता है तो पश्चिम एशिया में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

यह खबर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और एजेंसी इनपुट के आधार पर तैयार की गई है। समझौते की अंतिम पुष्टि संबंधित पक्षों द्वारा औपचारिक घोषणा के बाद ही मानी जाएगी।

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