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जंगली हाथियों का जबरदस्त आतंक, कभी भी दे सकते हैं बड़ा हादसा।
हल्दूचौड़
क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शाम ढलने से लेकर सुबह तक हाथियों की आवाजाही ग्रामीणों के लिए दहशत का कारण बनी हुई है। घरों के बिल्कुल पास तक पहुंच चुके हाथी अब गांव वालों के लिए खतरे का पर्याय बन चुके हैं।
बीती देर रात जंगली हाथियों के झुंड ने किसान प्रमोद बमेटा, कमलेश बमेटा, मुकेश गरवाल, सतीश बमेटा, दिनेश बमेटा गणेश दत्त बमेटा,खीमानंदबमेटा,भुवन
बमेटा, सहित कई ग्रामीणों के घरों के पास पहुंचकर भारी उत्पात मचाया। हाथियों ने चारे हेतु बोई गई बरसींम की फसल और गन्ने के खेतों को पूरी तरह तहस नहस कर दिया। किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में धराशायी हो गई, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।
मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के सरकारी दावों की भी इस घटना ने पोल खोल दी है। मुख्यमंत्री धाकड़ धामी तमाम दावों के बीच वन महकमे की उदासीनता से ऐसा प्रतीत होता है कि वन विभाग की सतर्कता सिर्फ कागजों में सिमटी है। शिकायतों के बाद भी मौके पर टीम का न पहुंचना और सुरक्षा इंतजामों का अभाव ग्रामीणों के गुस्से को और बढ़ा रहा है।
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता भी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय है। लोग आरोप लगा रहे हैं कि प्रतिनिधि सिर्फ आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल गश्त बढ़ाई जाए, फेंसिंग और ट्रेंचिंग की व्यवस्था हो, हाथियों की गतिविधियों वाले इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाए और फसल क्षति का उचित मुआवजा दिया जाए।
जंगली हाथियों का बढ़ता आतंक एक गंभीर समस्या बन चुका है। समय रहते ठोस कदम न उठाए गए तो यह स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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