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मशीने हैं, मरीज हैं, फिर क्यों ठप हैं सेवाएं?

हल्दूचौड़ सीएचसी पहुंचे विधायक-सीएमओ, वर्षों पुरानी समस्या पर फिर मिला समाधान का  टॉनिक!

प्रमोद बमेटा, हल्दूचौड़

हल्दूचौड़। क्षेत्र के 30 शैयायुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अल्ट्रासाउंड और रेडियोलॉजी सेवाओं को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच मंगलवार को लालकुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिश पंत ने अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेने के साथ ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

निरीक्षण में एक बार फिर वही तस्वीर सामने आई, जिसकी शिकायत क्षेत्रवासी लंबे समय से करते आ रहे हैं। अस्पताल में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन तकनीकी कर्मचारियों और विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को इन सुविधाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन लोगों को मामूली जांच के लिए भी हल्द्वानी और अन्य शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है।

विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने अधिकारियों को तकनीशियनों की व्यवस्था शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। वहीं सीएमओ डॉ. हरिश पंत ने भी जल्द समाधान का भरोसा दिलाते हुए कहा कि तकनीकी स्टाफ की कमी दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान बिंदुखत्ता अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और मोतीनगर में प्रस्तावित 200 बेड के अस्पताल व आईसीयू परियोजना पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को परियोजनाओं को शीघ्र गति देने के निर्देश दिए गए।

मीडिया और जनदबाव के बाद बढ़ी सक्रियता!

गौरतलब है कि हल्दूचौड़ सीएचसी में अल्ट्रासाउंड और रेडियोलॉजी सेवाएं शुरू करने की मांग वर्षों से उठ रही है। क्षेत्रवासियों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार स्वास्थ्य विभाग और शासन-प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया। स्थानीय मीडिया ने भी इस जनहित के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता बढ़ती दिखाई दी।

इससे पहले क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट भी क्षेत्रवासियों को जल्द समाधान का भरोसा दे चुके हैं। अब विधायक और सीएमओ के निरीक्षण के बाद एक बार फिर उम्मीदें जगी हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि उन्हें अब आश्वासनों से ज्यादा धरातल पर परिणाम का इंतजार है।

सवाल यह है जब अस्पताल में मशीनें पहले से मौजूद थीं, मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही थी और मांग वर्षों पुरानी थी, तो फिर आवश्यक तकनीकी स्टाफ की तैनाती अब तक क्यों नहीं हो सकी? क्या इस बार निरीक्षण के बाद हालात बदलेंगे या फिर मरीजों को जांच के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ेगा?

फिलहाल अस्पताल में प्रतिदिन करीब 300 मरीज पहुंच रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रवासियों की निगाहें अब निरीक्षण की तस्वीरों पर नहीं, बल्कि उन स्वास्थ्य सेवाओं पर टिकी हैं जिनका इंतजार वे वर्षों से कर रहे हैं।

उत्तराखंड