








बिंदुखत्ता के बाद अब रामनगर के खत्तों से भी उठी राजस्व ग्राम की हुंकार!
सुंदरखाल, देवीचौड़ा, धनगढ़ी और चौफुला खत्ता के ग्रामीणों का धरना, सांसद पर वादा खिलाफी का आरोप!
रामनगर। उत्तराखंड में खत्तों और वन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग अब अलग-अलग क्षेत्रों से उठती दिखाई दे रही है। बिंदुखत्ता में लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच अब रामनगर के सुंदरखाल, देवीचौड़ा, धनगढ़ी और चौफुला खत्ता के ग्रामीण भी राजस्व ग्राम की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। ग्रामीणों ने गर्जिया चौकी गेट के सामने धरना-प्रदर्शन कर सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी जताई।
ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से खत्तों में रहने के बावजूद उन्हें आज भी बुनियादी सुविधाओं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने सुंदरखाल, देवीचौड़ा खत्ता, चौफुला खत्ता और धनगढ़ी खत्ता को तत्काल राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग उठाई।
नदी कटाव, जंगली जानवर और बिजली का संकट!
धरने में ग्रामीणों ने केवल राजस्व ग्राम का दर्जा ही नहीं, बल्कि कोसी नदी के कटाव और बाढ़ से सुरक्षा के लिए मजबूत तटबंध बनाने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि बरसात के दौरान नदी का बढ़ता जलस्तर खेतों और आबादी के लिए खतरा बन जाता है।
ग्रामीणों ने जंगली जानवरों से लोगों, मवेशियों और फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी सोलर फेंसिंग और तारबाड़ लगाने तथा सभी घरों और बसावटों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।
2024 के चुनावी वादे पर उठाए सवाल!
सभा में ग्रामीणों ने लोकसभा सांसद अनिल बलूनी पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सांसद ने गांव पहुंचकर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और वन गांवों को राजस्व ग्राम बनाने का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि दो वर्ष बीत जाने के बाद भी उनकी मांगें धरातल पर क्यों नहीं उतर सकीं।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि अपने वादे पूरे नहीं कर सकते तो उन्हें जनता के सामने इसका जवाब देना चाहिए। कुछ वक्ताओं ने यहां तक कहा कि वादे पूरे नहीं कर पाने की स्थिति में जनप्रतिनिधियों को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
25 साल बाद भी वन गांवों का संघर्ष खत्म नहीं!
समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार ने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी वन गांवों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से संगठित होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करने का आह्वान किया।
दीपक जोशी ने कहा कि वन गांव और खत्तों के लोग एक ओर जंगली जानवरों के आतंक से परेशान हैं तो दूसरी ओर बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की समस्या से जूझ रहे हैं। कोसी नदी का बढ़ता जलस्तर भी ग्रामीणों के लिए खतरा बना हुआ है।
ग्राम स्तरीय समिति के अध्यक्ष प्रेम राम ने कहा कि सभी ग्रामीणों को एकजुट होकर आंदोलन को मजबूती से आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि लगातार संघर्ष के माध्यम से ही ग्रामीण अपनी मांगों को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचा सकते हैं।
सभा को महिला एकता मंच की सरस्वती जोशी, ललिता रावत, किसान नेता ललित उप्रेती, महेश जोशी, व्यापार मंडल संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, पूछड़ी कालू सिद्ध की मनोनीत ग्राम प्रधान अंजलि रावत, कमला देवी, केशव आर्य, पूरन प्रधान, कृष्णा, गणेश, मनमोहन और वीरू ने भी संबोधित किया। संचालन सूरज कुमार ने किया।
धरने में जगमोहन, योगेंद्र कुमार, वीरेंद्र कुमार, गुड्डू भाई, हरीश, दिनेश, नंदू किशोर, उत्तम चंद, उत्तम राम, खीमराम, मधुर देवी, अंजलि, दीपा, गीता, मोहिनी समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
