ढाई लाख आबादी की जीवनरेखा पर संकट! हल्दूचौड़ सीएचसी से एकमात्र विशेषज्ञ चिकित्सक का तबादला, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल!
टनकपुर को मिले पांच विशेषज्ञ चिकित्सक, हल्दूचौड़ से हटे एकमात्र विशेषज्ञ,क्षेत्रवासियों ने पूछा—क्या लालकुआं विधानसभा की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे?
दर्पण न्यूज 24/7 | हल्दूचौड़
लालकुआं विधानसभा क्षेत्र की लगभग ढाई लाख आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हल्दूचौड़ से एकमात्र विशेषज्ञ चिकित्सक एवं प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सुधीर कुमार कन्याल के स्थानांतरण ने क्षेत्र में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। पहले से चिकित्सकों, तकनीकी कर्मचारियों और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे अस्पताल से एकमात्र विशेषज्ञ चिकित्सक के तबादले को क्षेत्रवासी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा झटका मान रहे हैं।
शासन के वार्षिक स्थानांतरण आदेश के तहत डॉ. सुधीर कुमार कन्याल का तबादला उप जिला चिकित्सालय टनकपुर, जनपद चंपावत कर दिया गया है। इसी के साथ संबद्धीकरण समाप्त होने के बाद अस्पताल में कार्यरत पर्यावरण मित्र को भी मूल तैनाती स्थल लौटने के निर्देश दिए गए हैं। इन दोनों आदेशों के बाद अस्पताल की चिकित्सा और सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि हल्दूचौड़ सीएचसी वर्षों से संसाधनों के अभाव में संचालित हो रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे सहित कई आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। ऐसे हालात में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधीर कुमार कन्याल सीमित संसाधनों के बीच प्रतिदिन लगभग 250 से 300 मरीजों की ओपीडी संभालते हुए अस्पताल की पूरी व्यवस्था का संचालन कर रहे थे। उनके स्थानांतरण के बाद अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा लगभग समाप्त होने की स्थिति बन गई है।
आरटीआई एक्टिविस्ट एवं समाजसेवी गोविंद बल्लभ भट्ट ने कहा कि हल्दूचौड़ सीएचसी का मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय ने भी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसके बावजूद अस्पताल को और कमजोर करने वाले फैसले लिए जा रहे हैं, जो जनहित के विपरीत हैं।
उन्होंने मांग की कि जब तक डॉ. सुधीर कुमार कन्याल के स्थान पर समकक्ष विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक उन्हें कार्यमुक्त न किया जाए। यदि शासन स्थानांतरण पर अमल करना चाहता है तो पहले नए विशेषज्ञ चिकित्सक को कार्यभार ग्रहण कराया जाए, उसके बाद ही वर्तमान चिकित्सक को रिलीव किया जाए, ताकि मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस पूरे घटनाक्रम ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हल्दूचौड़ सीएचसी केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि लालकुआं विधानसभा क्षेत्र की लगभग ढाई लाख आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। ऐसे महत्वपूर्ण अस्पताल से एकमात्र विशेषज्ञ चिकित्सक का तबादला होने के बावजूद स्थानीय सांसद और विधायक की चुप्पी लोगों को अखर रही है।
क्षेत्र में चर्चा है कि क्या जनप्रतिनिधियों की नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे अपने क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर पर प्रभावी पहल करें? जब मुख्यमंत्री की विधानसभा क्षेत्र टनकपुर के उप जिला अस्पताल में एक साथ पांच विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जा सकती है, तो हल्दूचौड़ जैसे महत्वपूर्ण अस्पताल से एकमात्र विशेषज्ञ चिकित्सक को हटाने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
लोगों का कहना है कि सरकार यदि एक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर सकती है तो दूसरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करने का औचित्य समझ से परे है। इससे स्वास्थ्य सुविधाओं के समान वितरण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के डॉ. सुधीर कुमार कन्याल को कार्यमुक्त किया गया तो हजारों मरीजों को सामान्य उपचार के लिए भी हल्द्वानी और अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा। इससे गरीब और ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
जनप्रतिनिधियों की खामोशी को लेकर क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय विकास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जब अस्पताल को बचाने का समय आता है तो जनप्रतिनिधि मौन साध लेते हैं। अब जनता की निगाहें सांसद, विधायक और शासन पर टिकी हैं कि वे हल्दूचौड़ सीएचसी की स्वास्थ्य सेवाओं को बचाने के लिए ठोस पहल करते हैं या फिर लालकुआं विधानसभा की ढाई लाख आबादी को बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के भरोसे छोड़ दिया जाएगा।
क्षेत्रवासियों ने शासन से मांग की है कि हल्दूचौड़ सीएचसी में तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, आवश्यक स्टाफ की तैनाती तथा एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड सहित सभी मूलभूत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि क्षेत्र की जनता को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

