खबरें शेयर करें -

बंशीधर तिवारी की पहल से एमडीडीए को मिली नई पहचान!

जनता की कल्पना को मिला मंच, मैस्कॉट और स्लोगन प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित!

दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | प्रमोद बमेटा

देहरादून। एमडीडीए की पहचान अब सिर्फ नक्शों, योजनाओं और विकास कार्यों तक सीमित रखने के बजाय उसे जनता की रचनात्मक सोच से जोड़ने की पहल हुई है। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की पहल पर आयोजित मैस्कॉट डिजाइन एवं स्लोगन प्रतियोगिता-2026 के विजेताओं को बुधवार को प्राधिकरण कार्यालय में सम्मानित किया गया।

समारोह में उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने विजेताओं को पुरस्कार राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए। संयुक्त सचिव गौरव चटवाल, वित्त नियंत्रक संजीव कुमार समेत प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारी और प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागी मौजूद रहे।

पहचान गढ़ने का अधिकार जनता को!

एमडीडीए ने 3 से 16 अगस्त तक मैस्कॉट डिजाइन एवं स्लोगन प्रतियोगिता आयोजित की थी। उद्देश्य केवल एक प्रतीक या स्लोगन चुनना नहीं, बल्कि प्राधिकरण की सोच, विकास दृष्टि और भविष्य की दिशा को जनता की रचनात्मकता से अभिव्यक्ति देना था।

प्रतियोगिता में सामने आई प्रविष्टियों ने दिखाया कि किसी सरकारी संस्था की पहचान केवल उसके कामकाज से नहीं बनती। जनता को अपनी कल्पना और सोच सामने रखने का अवसर मिले तो वही रचनात्मकता संस्थागत पहचान का हिस्सा बन सकती है।

मैस्कॉट में स्नेहा, स्लोगन में अंकित अव्वल!

मैस्कॉट डिजाइन प्रतियोगिता में स्नेहा ह. भंडारी ने प्रथम स्थान हासिल किया। उन्हें 50 हजार रुपये और प्रशस्ति-पत्र दिया गया। अनुराग रमोला को द्वितीय पुरस्कार के रूप में 30 हजार रुपये, जबकि अंकिता बिष्ट को तृतीय पुरस्कार के रूप में 15 हजार रुपये प्रदान किए गए।

स्लोगन प्रतियोगिता में अंकित सिंह रावत प्रथम रहे। उन्हें 10 हजार रुपये और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

सरकारी पहचान में जनभागीदारी की दस्तक!

एमडीडीए की यह पहल प्राधिकरण की पहचान को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश के तौर पर सामने आई है। बंशीधर तिवारी ने प्रतिभागियों की रचनात्मकता को मंच देकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि विकास प्राधिकरण की पहचान सिर्फ उसकी योजनाओं और भवनों से नहीं, बल्कि समाज से उसके संवाद और जुड़ाव से भी बनती है।

अब प्रतियोगिता में चयनित मैस्कॉट और स्लोगन एमडीडीए की सार्वजनिक पहचान को किस तरह नया रूप देते हैं, इस पर निगाह रहेगी।

उत्तराखंड