तराई पूर्वी वन प्रभाग में बेलगाम लकड़ी तस्करी: पीछा करने पर तस्कर फरार, कार समेत बेशकीमती सागौन बरामद!
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं/किच्छा।
तराई पूर्वी वन प्रभाग में लकड़ी तस्करी पर लगाम लगाने के दावों के बावजूद तस्करों के हौसले लगातार बुलंद नजर आ रहे हैं। शनिवार तड़के वन विभाग की सक्रियता के बावजूद तस्कर मौके से फरार हो गए, हालांकि उनकी कार से बेशकीमती सागौन की लकड़ी बरामद कर ली गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 04 अप्रैल 2026 को प्रातः करीब 06:00 बजे मुखबिर की सटीक सूचना पर वन विभाग की टीम शांतिपुरी–किच्छा राष्ट्रीय राजमार्ग पर गश्त कर रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध हुंडई सेंट्रो (UK06-Y-9147) को रोकने का प्रयास किया गया।
वन टीम द्वारा पीछा कर वाहन को ओवरटेक कर रोका गया, लेकिन कार में सवार समीर उर्फ छम्मी (निवासी टीला बीट, गौला रेंज) और आकाश सिंह (निवासी साफ कटानी, लालकुआं) मौके का फायदा उठाकर वाहन छोड़कर पास की झाड़ियों में फरार हो गए।
वन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए कार को कब्जे में लेकर उसमें लदी अवैध सागौन की लकड़ी बरामद की। वाहन को सुरक्षित लालकुआं वन परिसर, डॉली रेंज में खड़ा कर दिया गया है। फरार अभियुक्तों की तलाश जारी है और उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है।
गश्ती दल में नवीन सिंह पवार (वन क्षेत्राधिकारी) राज कुमार
सुरेश चन्द्र परगांई राजेन्द्र सिंह लटवाल आदि शामिल रहे।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। हर बार तस्करों का फरार हो जाना कई आशंकाओं को जन्म देता है क्या तस्करों को पहले से सूचना मिल जाती है, या तंत्र में कहीं बड़ी चूक है?
तराई पूर्वी वन प्रभाग में तस्कर अब बेखौफ होकर राष्ट्रीय राजमार्गों का इस्तेमाल कर बेशकीमती लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
यदि समय रहते सख्त निगरानी और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह तस्करी न केवल जंगलों के अस्तित्व के लिए खतरा बनेगी, बल्कि सरकार के राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचाएगी।
सूत्रों के अनुसार, आकाश सिंह पूर्व में टांडा रेंज में भी लकड़ी तस्करी के मामलों में लिप्त रह चुका है।
