लगातार मौतों के बाद जागा प्रशासन! एनएच-109, तीनपानी बाईपास और जिले की सड़कों पर अब चलेगा बड़ा सुरक्षा अभियान।गोरापड़ाव तिराहा, तीनपानी बाईपास, हल्दूचौड़ और रामपुर रोड तक लगातार सड़क हादसों में हुई मौतों के बाद डीएम का बड़ा एक्शन, ब्लैक स्पॉट सुधारने से लेकर बीएनएस के तहत सख्त कार्रवाई के निर्देश!
हल्द्वानी। आखिरकार लगातार हो रही दर्दनाक सड़क दुर्घटनाओं और एक के बाद एक उजड़ते परिवारों के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-109, तीनपानी बाईपास, गोरा पड़ाव, हल्दूचौड़ और रामपुर रोड जैसे संवेदनशील मार्गों पर लगातार हुई मौतों ने प्रशासन को सड़क सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के लिए मजबूर कर दिया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सड़क सुरक्षा के मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दरअसल, हाल के दिनों में गोरा पड़ाव के बेतरतीब कट पर लालकुआं के दो होनहार युवाओं की मौत, तीनपानी बाईपास पर चार युवाओं की दर्दनाक जान जाने, एनएच-109 के हल्दूचौड़ क्षेत्र और शुक्रवार को रामपुर रोड पर हुए हादसे में दो पूर्व सैनिकों की सड़क दुर्घटना में मौत जैसी घटनाओं ने पूरे जिले को झकझोर दिया। लगातार हादसों के बाद प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है।
कैम्प कार्यालय हल्द्वानी में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जनपद के चिन्हित ब्लैक स्पॉट का तत्काल सुधार किया जाए। जहां सड़क की बनावट, संकेतकों की कमी अथवा अन्य कारणों से दुर्घटनाएं हो रही हैं, वहां बिना देरी सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक कार्य पूरे किए जाएं।
सबसे अधिक फोकस लगातार हादसों का केंद्र बने राष्ट्रीय राजमार्ग 109 पर रहा। जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग और एनएचएआई अधिकारियों को निर्देश दिए कि रात के समय दृश्यता बढ़ाने के लिए सेंसर आधारित एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं। साथ ही रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड, सीसीटीवी कैमरे और वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त रम्बल स्ट्रिप तत्काल स्थापित की जाएं, ताकि दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
जिलाधिकारी ने तीनपानी बाईपास और अन्य व्यस्त मार्गों पर पीक आवर्स के दौरान पुलिस एवं परिवहन विभाग की अतिरिक्त तैनाती के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गलत दिशा में वाहन चलाना और तेज रफ्तार अब सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ केवल चालान ही नहीं, बल्कि ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने, वाहन सीज करने और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-281 के तहत भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी दुर्घटना संभावित स्थलों पर क्रैश बैरियर, पैराफिट, चेतावनी बोर्ड, स्पीड ब्रेकर और निर्धारित गति सीमा के अनुरूप संकेतक लगाए जाएंगे, जिससे वाहन चालकों को पहले से सतर्क किया जा सके।
खनन क्षेत्रों की बदहाल सड़कों का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। जिलाधिकारी ने बताया कि कोसी, अमृतपुर और गौला क्षेत्र में खनिज वाहनों की आवाजाही से क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत के लिए खनिज न्याय निधि से 10 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। लोक निर्माण विभाग को शीघ्र मरम्मत कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार की पीएम राहत योजना की भी जानकारी दी गई। इसके तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को दुर्घटना की तिथि से सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाता है। अधिकारियों को इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सड़क सुरक्षा पखवाड़े के तहत जिलाधिकारी स्वयं सड़क पर उतरे और बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चला रहे लोगों को हेलमेट वितरित किए। उन्होंने कहा कि हेलमेट केवल चालान से बचने का साधन नहीं, बल्कि जीवन बचाने का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है।
बैठक में पुलिस अधीक्षक यातायात जगदीश चंद्र, संभागीय परिवहन अधिकारी अरविंद पांडे, विकास प्राधिकरण सचिव मनीष कुमार, नगर आयुक्त परितोष वर्मा, लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग, एनएचएआई तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
लगातार बढ़ते सड़क हादसों के बीच प्रशासन का यह एक्शन प्लान निश्चित रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि गोरा पड़ाव, तीनपानी बाईपास, हल्दूचौड़ और अन्य संवेदनशील स्थलों पर अब तक केवल बैठकों तक सीमित रहे फैसले इस बार कितनी तेजी से धरातल पर उतरते हैं। क्योंकि बीते कुछ दिनों में हुई कई दर्दनाक मौतें यह संदेश दे चुकी हैं कि सड़क सुरक्षा में अब एक दिन की भी देरी किसी और परिवार की खुशियां छीन सकती है।
