दर्पण न्यूज 24×7
संवाददाता — प्रमोद बमेटा
कृष्णा नवाड़ और गंगापुर में हाथियों का तांडव, किसानों की गन्ने की फसल बर्बाद।
लालकुआं।
भानदेव नवाड़ में तबाही मचाने के बाद हाथियों का झुंड अब कृष्णा नवाड़ और गंगापुर की ओर पहुंच गया है। बुधवार देर रात हाथियों ने गन्ने के खेतों में घुसकर कई किसानों की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। सुबह हुए निरीक्षण में खेतों में टूटे गन्ने, रौंदे हुए पौधे और बर्बादी का स्पष्ट दृश्य दिखाई दिया।
हाथियों द्वारा नुकसान पहुंचाई गई फसल नौलख किस्म की बताई जा रही है। किसान विपिन चन्द्र कबड़वाल, गोपाल कबड़वाल, हरीश कबड़वाल, सतीश कबड़वाल और मोहन कबड़वाल की कई एकड़ गन्ने की फसल रातोंरात नष्ट हो गई। किसानों ने बताया कि यह फसल पूरे साल की मेहनत से तैयार हुई थी, लेकिन हाथियों के हमले ने पूरा प्रयास चौपट कर दिया।
मदद के लिए फोन किए, पर विभाग से नहीं मिली कोई प्रतिक्रिया
किसानों ने आरोप लगाया कि हाथियों के हमले की सूचना देने के लिए उन्होंने रातभर वन विभाग के अधिकारियों को फोन किए, लेकिन किसी ने फोन उठाना जरूरी नहीं समझा। किसानों का कहना है कि नुकसान का आकलन तो दूर, मौके पर कोई कर्मचारी तक नहीं पहुँचा।
दर्पण न्यूज 24×7 की टीम ने घटना स्थल का निरीक्षण किया। मौके पर मौजूद किसानों ने बताया कि विभाग द्वारा धान की फसल को हुए नुकसान की फाइलें पहले से लंबित हैं, और अब गन्ने की फसल को लेकर भी विभाग किसी कार्रवाई के मूड में दिखाई नहीं दे रहा।
जिम्मेदार अधिकारी खुद मौके पर आने के बजाय बीट इंचार्ज भेजने की बात पर अटके ।
हमारे संवाददाता द्वारा जब वन क्षेत्राधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं लगा। बाद में वन दरोगा से संपर्क होने पर उन्होंने बताया कि क्षेत्राधिकारी आवश्यक कार्य से बाहर हैं और बीट इंचार्ज को भेजा जाएगा।
हालाँकि किसानों का कहना है कि ऐसे आश्वासन कई बार सुन चुके हैं, लेकिन मौके पर हाथ बंटाने या नुकसान का सर्वे करने कोई नहीं आता।
किसानों में बढ़ रहा आक्रोश, चेतावनी: देंगे धरना।
नुकसान से परेशान किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही वन विभाग द्वारा नुकसान का सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो वे प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में धरना देने को मजबूर होंगे।
किसानों का कहना है कि जंगल के पास रहने की मजबूरी के चलते वे हर साल हाथियों के उत्पात का सामना करते हैं, लेकिन विभाग की उपेक्षा ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
प्राकृतिक चुनौती और विभागीय निष्क्रियता से किसान परेशान
किसानों ने कहा कि हाथियों का आना प्राकृतिक चुनौती है, लेकिन विभागीय लापरवाही उनके लिए सबसे बड़ी समस्या बन गई है। लगातार फसलों का नुकसान, मुआवजा फाइलों का लंबित रहना और अधिकारियों का मौके पर न पहुंचना किसानों की पीड़ा को और बढ़ा रहा है।
दर्पण न्यूज 24×7 आगे भी इस मामले की पड़ताल जारी रखेगा और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाता रहेगा।
प्रमोद बमेटा
संवाददाता, दर्पण न्यूज 24×7
