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आदि कैलाश यात्रा ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, 40 दिनों में 37,818 इनर लाइन परमिट जारी!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | प्रमोद बमेटा
पिथौरागढ़। उत्तराखंड की बहुचर्चित आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। यात्रा शुरू होने के मात्र 40 दिनों के भीतर ही प्रशासन ने 37,818 इनर लाइन परमिट (विशेष अनुमति पत्र) जारी कर नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है। खास बात यह है कि यह आंकड़ा पिछले पूरे वर्ष जारी किए गए कुल परमिटों से भी अधिक है।
जिला प्रशासन के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 36,526 परमिट जारी किए गए थे, लेकिन इस बार यह रिकॉर्ड 8 जून को ही टूट गया। उस दिन देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं को 1,194 परमिट जारी किए गए, जिससे कुल संख्या 36,776 पहुंच गई। इसके बाद 9 जून को भी 1,042 परमिट जारी किए गए, जबकि पिछले वर्ष इसी तारीख को केवल 618 परमिट दिए गए थे।
भारत-चीन और नेपाल सीमा से सटे इस संवेदनशील क्षेत्र की यात्रा एक मई से शुरू हुई है और नवंबर तक संचालित रहेगी। हालांकि मानसून के दौरान जुलाई और अगस्त में यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित रहती है।
एक लाख यात्रियों का आंकड़ा पार होने की उम्मीद
धारचूला स्थित कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) बेस कैंप के प्रभारी धन सिंह बिष्ट ने बताया कि इस वर्ष यात्रियों की संख्या एक लाख के पार पहुंचने की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि अभी बड़ी संख्या में पर्यटक और अवकाश बिताने वाले लोग पहुंच रहे हैं, जबकि पारंपरिक तीर्थयात्रियों की आमद जून के मध्य के बाद और बढ़ने की उम्मीद है।
होमस्टे बने स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़
पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता का श्रेय क्षेत्र में विकसित हो रही होमस्टे सुविधाओं को दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर आवास और सुविधाओं के कारण अब ऊंचाई वाले सीमांत क्षेत्रों की यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो गई है।
डीएम ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती संख्या से परिवहन, होमस्टे, स्थानीय हस्तशिल्प, खानपान और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। इससे सीमांत गांवों के लोगों की आय बढ़ रही है और पलायन पर भी अंकुश लग रहा है।
सीमा सुरक्षा में भी अहम भूमिका
प्रशासन का मानना है कि सीमावर्ती गांवों में लोगों की निरंतर मौजूदगी राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। भारत-चीन-नेपाल त्रिकोणीय सीमा के निकट बसे ग्रामीण संकट या किसी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों के लिए ‘आंख और कान’ का काम करते हैं। ऐसे में पर्यटन और तीर्थाटन का बढ़ना न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था बल्कि सीमा सुरक्षा को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
आदि कैलाश और ओम पर्वत की बढ़ती लोकप्रियता ने इस बार पर्यटन और तीर्थाटन के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए हैं। यदि यही रफ्तार बनी रही तो वर्ष 2026 उत्तराखंड के सीमांत पर्यटन के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो सकता है।