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🔥 ब्रेकिंग EXCLUSIVE | दर्पण न्यूज 24×7 🔥
शिक्षा विभाग में ‘दिव्यांगता घोटाला’ फूटा — 51 शिक्षक कटघरे में, अब आंच प्रधानाध्यापकों तक!

देहरादून।
उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को हिला देने वाला बड़ा फर्जीवाड़ा घोटाला आखिरकार सतह पर आ गया है! दो साल से दफ्तरों में दबा यह मामला अब फट पड़ा है, और शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। दिव्यांगता के फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर सरकारी नौकरी पर काबिज 51 शिक्षकों को आखिरकार नोटिस थमा दिया गया है।

और सबसे बड़ा झटका —
➡️ 1991 में भर्ती हुए और अब प्रधानाध्यापक बन चुके शिक्षक भी आरोपी सूची में शामिल!
➡️ 2022 में मेडिकल बोर्ड ने सर्टिफिकेट फर्जी घोषित किए, पर विभाग 2 साल तक ‘मौन’!
➡️ न्यायालय आयुक्त दिव्यांगजन के दखल के बाद अब हड़कंप, 15 दिन में जवाब तलब।

🔥 क्या है पूरा मामला?

शिक्षा विभाग के जिन 51 शिक्षकों को नोटिस मिला है, उन्होंने नौकरी पाने के लिए दिव्यांगता कोटे का गलत इस्तेमाल किया। मेडिकल बोर्ड ने 2022 में ही इन सभी प्रमाण पत्रों को फर्जी घोषित कर दिया था, लेकिन ना शिक्षा विभाग जागा, ना स्वास्थ्य विभाग।

दोनों विभागों की 2 साल की चुप्पी अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है—
क्या यह सिर्फ लापरवाही है या एक संगठित रैकेट?

⚖️ अदालत को उठाना पड़ा कदम

एक जनहित याचिका के बाद दिव्यांगजन आयुक्त न्यायालय ने जब सख्ती दिखाई और सूची मांगी, तब जाकर विभाग हरकत में आया। आनन-फानन में सभी 51 शिक्षकों को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है।

📌 जड़ें बहुत गहरी… 1991 से 2020 तक फैला घोटाला

इस घोटाले में शामिल शिक्षक अलग-अलग सालों में भर्ती हुए —
✔️ 1991 बैच के शिक्षक, आज प्रधानाध्यापक
✔️ 2019–20 के नए भर्ती शिक्षक भी शामिल

सबसे ज्यादा मामले टिहरी जिले से सामने आए हैं, जबकि देहरादून, पौड़ी और उत्तरकाशी में भी ऐसे शिक्षकों की तैनाती पाई गई है।

🕵️‍♂️ जांच कमेटी गठित — असली सफाई अब शुरू

शासन ने गहराई से जांच के लिए निदेशक माध्यमिक शिक्षा मुकुल सती की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है।
इसमें प्रमाण पत्रों की जांच, नौकरी में हुई नियुक्ति और विभागीय भूमिका को खंगाला जाएगा।

🚨 बड़ा सवाल – क्या यह सिर्फ शुरुआत है?

शिक्षा विभाग में मिले इस फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र घोटाले ने पूरे तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब मांग उठने लगी है कि—
➡️ बेसिक शिक्षा,
➡️ अन्य सरकारी विभाग,
➡️ पुरानी भर्तियाँ
भी बड़े स्तर पर जांच के दायरे में लाई जाएं, ताकि इस ‘फर्जी सर्टिफिकेट नेटवर्क’ का असली चेहरा सामने आए।

🔥 दर्पण न्यूज 24×7 की बड़ी रिपोर्ट

यह सिर्फ 51 शिक्षकों का मामला नहीं…
यह सिस्टम में घुस चुके फर्जीवाड़े के नेटवर्क का बड़ा खुलासा है।
अब सवाल यह है कि—
क्या सरकार इतनी बड़ी सफाई के लिए तैयार है?
या फिर यह भी बाकी घोटालों की तरह फाइलों में दब जाएगा?

 

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