पौड़ी में बाघ का आतंक चरम पर! महिला की दर्दनाक मौत, विधायक बोले—“हालात नहीं सुधरे तो दे दूंगा इस्तीफा”
पौड़ी गढ़वाल।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में वन्यजीव हमलों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। लैंसडाउन क्षेत्र में बाघ के आतंक ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। शुक्रवार शाम को हुए एक और दर्दनाक हमले ने पूरे क्षेत्र को दहशत और गुस्से में भर दिया।
जयहरीखाल ब्लॉक के सिरोबाड़ी गांव में 60 वर्षीय उर्मिला देवी अपने घर से कुछ दूरी पर थीं, तभी घात लगाए बैठे बाघ ने उन पर हमला कर दिया। बाघ उन्हें घसीटते हुए जंगल की ओर ले गया। उर्मिला देवी की बहू प्रिया के चीखने-चिल्लाने पर ग्रामीण मौके पर दौड़े, लेकिन तब तक बाघ झाड़ियों में गायब हो चुका था। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और तलाश के बाद महिला के शव को बरामद कर शाम तक परिजनों के घर पहुंचाया गया। घटना के बाद गांव में मातम के साथ-साथ प्रशासनिक लापरवाही पर आक्रोश साफ देखने को मिला।
घटना की जानकारी मिलते ही लैंसडाउन क्षेत्र के विधायक दिलीप रावत भी गांव पहुंचे। पीड़ित परिवार से मिलने के बाद उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में वन्यजीव हमले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। जिस गांव में यह दर्दनाक हादसा हुआ, वहां पुल तो बन चुका है, लेकिन उसे जोड़ने वाली सड़क पिछले ग्यारह वर्षों से अधर में पड़ी है। ग्रामीण मजबूरी में जंगल के रास्तों से गुजरते हैं और यह मजबूरी अब लोगों की जान ले रही है।
विधायक रावत ने कहा कि बाघ को पकड़ने या शूट करने जैसी निर्णायक कार्रवाई अब टाली नहीं जा सकती। उन्होंने मांग उठाई कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वन अधिनियम में तुरंत संशोधन किए जाएं और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था तत्काल लागू की जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी बातों को लगातार नजरअंदाज किया गया, तो वह इस्तीफा देने पर भी विचार करेंगे। उनका कहना था कि जनता की सुरक्षा से बड़ा कोई पद नहीं होता।
गांव में ग्रामीणों का भी गुस्सा साफ देखने को मिला। उनका आरोप है कि वन विभाग हर बार घटना के बाद ही सक्रिय होता है। रोकथाम के नाम पर कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। महिलाएं और बच्चे रोजाना खतरे में रहते हैं और सुरक्षित सड़क न होना उनकी सबसे बड़ी मजबूरी है।
उधर, रामनगर के पतरामपुर रेंज में भी गुलदार ने एक युवक पर हमला कर उसे घायल कर दिया। वन विभाग की टीम उसे जसपुर अस्पताल लेकर पहुंची, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया। लगातार हो रहे इन हमलों ने पहाड़ी जिलों में मानव–वन्यजीव संघर्ष को और गहरा कर दिया है, जिससे लोगों में दहशत के साथ-साथ प्रशासन के प्रति नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।
