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एनएच-109 पर मौत का सफर: लालकुआं से हल्द्वानी तक हादसों की राह बनता राजमार्ग!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो प्रमोद बमेटा!

लालकुआं।
लालकुआं से हल्द्वानी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-109 इन दिनों विकास की पहचान कम और सड़क हादसों के लिए अधिक चर्चा में है। पिछले कुछ समय में इस मार्ग पर हुई दुर्घटनाओं ने न केवल कई परिवारों की खुशियां छीनी हैं, बल्कि राजमार्ग की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर हादसे के बाद कुछ दिनों तक चर्चा होती है, लेकिन हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिखता। नतीजा यह है कि यह मार्ग धीरे-धीरे दुर्घटनाओं के लिए कुख्यात होता जा रहा है।
कुमाऊं के प्रवेश द्वार माने जाने वाले इस राजमार्ग पर प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। औद्योगिक क्षेत्र, खनन गतिविधियां, पर्यटन और स्थानीय यातायात का भारी दबाव इस मार्ग पर बना रहता है। इसके बावजूद सड़क सुरक्षा से जुड़े कई बुनियादी पहलू उपेक्षित नजर आते हैं। सबसे बड़ी समस्या  बेतरतीब कट हैं। कई स्थानों पर बिना वैज्ञानिक अध्ययन और पर्याप्त सुरक्षा उपायों के कट छोड़ दिए गए हैं, जहां से अचानक वाहन मुख्य मार्ग पर आ जाते हैं। तेज रफ्तार में चल रहे वाहनों को प्रतिक्रिया का समय नहीं मिल पाता और हादसे हो जाते हैं।
राजमार्ग पर सर्विस रोड की स्थिति भी चिंता का विषय है। सर्विस रोड नहीं होने के चलते लोग सीधे हाईवे पर आने को मजबूर हैं। दोपहिया वाहन, ई-रिक्शा, साइकिल सवार और पैदल यात्री भी मुख्य मार्ग का उपयोग करते दिखाई देते हैं। इससे तेज गति वाले वाहनों और स्थानीय यातायात के बीच टकराव की स्थिति लगातार बनी रहती है।
इस मार्ग पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही भी किसी से छिपी नहीं है। खनन सामग्री और अन्य भारी माल ढोने वाले ट्रक दिन-रात दौड़ते रहते हैं। कई बार निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले वाहन सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं। ऐसे वाहनों की ब्रेकिंग क्षमता प्रभावित होती है और दुर्घटना की स्थिति में नुकसान कई गुना बढ़ जाता है।
हाईस्पीड भी हादसों की एक बड़ी वजह बनकर उभरी है। राष्ट्रीय राजमार्ग होने के कारण वाहन चालक अक्सर गति सीमा को नजरअंदाज कर देते हैं। रात के समय यह स्थिति और गंभीर हो जाती है। स्पीड मॉनिटरिंग और प्रभावी प्रवर्तन की कमी के कारण कई चालक बेखौफ होकर वाहन दौड़ाते हैं। परिणामस्वरूप छोटी सी चूक भी बड़े हादसे में बदल जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दुर्घटना संभावित स्थान वर्षों से चिन्हित हैं, लेकिन वहां स्थायी सुधार नहीं किए गए। कहीं पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं है तो कहीं चेतावनी संकेतक नदारद हैं। कई स्थानों पर अतिक्रमण और अनियोजित प्रवेश मार्ग भी दुर्घटनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग की सफलता केवल चौड़ी सड़क बनाने से नहीं मापी जा सकती, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करती है कि वह मार्ग यात्रियों को कितना सुरक्षित सफर उपलब्ध करा रहा है।
हाल के दिनों में हुई कई दर्दनाक दुर्घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समस्या केवल वाहन चालकों की लापरवाही तक सीमित नहीं है। सड़क डिजाइन, यातायात प्रबंधन, प्रवर्तन और सुरक्षा मानकों के पालन में मौजूद कमियां भी इसके लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं। यदि समय रहते इन खामियों को दूर नहीं किया गया तो आने वाले समय में हादसों का यह सिलसिला और भयावह रूप ले सकता है।
लालकुआं से हल्द्वानी तक का यह राजमार्ग कुमाऊं की जीवनरेखा माना जाता है, लेकिन जिस तरह लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, उससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विकास की इस सड़क पर लोगों को सुरक्षित सफर कब मिलेगा। जब तक सुरक्षित कट , सर्विस रोड की व्यवस्था, ओवरलोड वाहनों पर सख्ती और गति नियंत्रण के प्रभावी उपाय नहीं किए जाते, तब तक एनएच-109 पर सफर करने वाला हर व्यक्ति अनजाने खतरे के बीच यात्रा करने को मजबूर रहेगा।