बिंदुखत्ता आर-पार की जंग के मूड में: राजस्व गांव की मांग पर जन आंदोलन का ऐलान, 11 जनवरी को निर्णायक बैठक।
लालकुआँ।
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित किए जाने की वर्षों पुरानी मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। शासन–प्रशासन की लगातार अनदेखी से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। इसी कड़ी में राजस्व गांव की मांग को लेकर जन आंदोलन का औपचारिक ऐलान कर दिया गया है।
कार रोड में आयोजित ग्रामीणों की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद बिंदुखत्ता को आज तक राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे ग्रामीणों में गहरी चिंता के साथ-साथ जबरदस्त रोष है। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि 11 जनवरी को कार रोड में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि अब यह लड़ाई किसी दल या नेता की नहीं, बल्कि बिंदुखत्ता के भविष्य की लड़ाई है। सभी वर्गों से अपील की गई कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता के साथ इस आंदोलन में शामिल हों, ताकि जन आंदोलन के जरिए राजस्व गांव का दर्जा हासिल किया जा सके।
बैठक में प्रमुख रूप से हरीश बिसोती, कुंदन सिंह मेहता, इंदर सिंह पनेरी, कमल सिंह दानू, पुष्कर सिंह दानू, मोहन चंद्र कुराई, भुवन जोशी, कमलापति जोशी, पुष्कर दुबड़िया, प्रमोद कॉलोनी, बसंत पांडे, बिमला रौथांण, मीना कपिल, किशन सिंह बघरी, रमेश कुमार, नरेंद्र बिष्ट, राजेंद्र चौहान समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि यदि अब भी मांग को अनसुना किया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
