वीरेंद्र रावत , लो देखो अपने पिता की करतूत। मुख्यमत्री रहते देखो कैसे तेरे पिता जी राज्य बेच रहे थे और मुझसे कह रहे थे मैं आँखे बंद कर लूँगा जिसको 25-30 करोड़ 100 कमाने है कमा लें। तुम्हरे पिता जी ने हर लालच दिया था मुझे इस स्टिंग को रोकने के लिए, मुझसे कहा था तीन मंत्री बना दूँगा तुम्हारे 50 करोड़ दूँगा, लेकिन मुझे ख़रीद नहीं पाये और मैंने तुम्हारे पिता की भ्रष्ट सरकार गिरा दी थी अकेले दम पर। भाजपा का एजेंट पता है कौन है ? तुम्हरे पिता जी, जो हर बार साजिशों करके कांग्रेस के मजबूत प्रत्याशियों के ख़िलाफ़ डमी कैंडिडेट पहाड़ में तो खड़े करते ही है हरिद्वार में भी खड़े करते चाहे पिरान कलियर हो , चाहे मंगलौर या झबरेड़ा ताकि जोड़-तोड़ की राजनीति हो और वो मुख्यमंत्री बन जाये, मेरी बात पर भरोसा नहीं है तो इतिहास उठाकर देख लेना। इतिहास उठाकर देख लेना। तुन्हारे पिता के बारे में हमेशा एक बात कहता हूँ , उन्होंने जिसके कंधे पर हाथ रखा उसे 6 महीने बाद पता लगता है वहाँ ज़ख्म हो गया। एक बात और सुनना , जब तुन्हारे पिता ताक़तवर मुख्यमंत्री, मैं तब उनसे नहीं डरा और उखाड़ा फेंका, तुम तो हो किस खेत की मूली। एक बात बताओ ढाई साल पहले हरिद्वार की जनता ने तुम्हें 5.50 लाख वोट दिया था, हारने के बाद तुम ढाई साल कहाँ थे ? किसी के सुख-दुख में शामिल हुए ? जिस मुसलमान के कंधे पर बैठकर तुम चुनाव लड़ना चाहते हो, वो मुसलमान तुमसे कुछ सवाल कर रहा है, जब मदरसे सील हो रहे थे तो तुम कहाँ थे ? जब सहसपुर में घटना घटी तो कहाँ थे ? अब्दुल कलाम चौक पर 700 साल पुरानी मस्जिद तोड़ी तो कहाँ थे ? जब मदरसों का मामला सुप्रीम कोर्ट में लड़ना था तब कहाँ थे ? तुमने हरिद्वार के मुसलमान का सिर्फ़ मूर्ख बनाया और राजनीति करी। दम है तुम में तो जाओ पहाड़ से लड़ो ना , तुम भाई हरिद्वार से सांसद लड़ोगे फिर विधायक भी लड़ोगे, बहन भी हरिद्वार से लड़ेगी, माँ भी हरिद्वार से लड़ेगी और पिता जी भी हरिद्वार से लड़ेंगे , वाह! फ़ैमिली अफेयर हो गया तुमहारा तो और हरिद्वार के लोग तुम्हारे। तुम्हरे पिता तो पहाड़ के दिग्गज नेता है , लड़ो ना पहाड़ से और दिखाओ जीतकर। सुनो वीरेंद्र रावत, हार-जीत तो जनता के हाथ में है लेकिन मेरा कलेजा कितना बड़ा है इसका अंदाजा तुम इस बात से लगाओ कि एक आदमी मुख्यमंत्री का स्टिंग करके बिना डरे चला सकता है और तुम्हारी सरकार गिरा सकता है और तुन्हारे पिता के वापस सीएम बनने पर उसी स्टेट में सीना चौड़ा करके तुम्हरे सामने रहा। अगली किश्त तुम्हें कल सुबह के नाश्ते के साथ दूँगा। बड़ी लंबी जबान हो रही है ना , नेता नहीं रीलबाज़ है , कहाँ है सिडकुल , कहाँ है अस्पताल, कभी खादर का दौरा करो तो पता चलेगा कहाँ क्या बना और किस गाँव में कितना काम हुआ । जोकर जैसे क्यों बात करते हो ? कहाँ है सिडकुल , 20 हज़ार करोड़ की योजना क्या एक दिन में बन जाएगा ? पॉवर सब स्टेशन क्या तुम लगाओगे ? ड्रेनेज सड़कें , इंफ्रा , 500-800 बीघा जमीन का 10 फिट भराव तुम करोगे ? मजाक चल रहा है क्या ? बड़ा आए पूछने वाले दूरबीन से नहीं दिख रहा , दूरबीन के बिना तुम्हें और तुमहरे पिता जी को सिर्फ़ नोट दिखते है सिडकुल नहीं। गले तक भ्रष्टाचार में डूबे लोग जिन्होंने ये राज्य बेच दिया, मुझ पर उँगली उठाते है , वाह!!
