खबरें शेयर करें -

आठ करोड़ की इमारत, लाखों के उपकरण और खड़ी एंबुलेंस… फिर भी स्वास्थ्य सुविधाओं को तरस रहा हल्दूचौड़!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | प्रमोद बमेटा |

हल्दूचौड़
हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्थिति आज सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की उस विडंबना को उजागर कर रही है, जहां भवन, उपकरण और संसाधन तो उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन नहीं हैं। करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस अस्पताल पर क्षेत्र की डेढ़ लाख से अधिक आबादी निर्भर है, लेकिन चिकित्सकों और तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं।
अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 350 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, जबकि वर्तमान में यहां केवल चार चिकित्सक ही तैनात हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ रही है, क्योंकि अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को प्रसव और अन्य जरूरी उपचार के लिए हल्द्वानी सहित अन्य अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है।
स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2024 में सेंचुरी पेपर मिल द्वारा सीएसआर मद के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई एंबुलेंस आज भी अस्पताल परिसर में खड़ी है। चालक और संचालन से जुड़े आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति न होने के कारण दो वर्षों से यह एंबुलेंस मरीजों की सेवा में नहीं आ सकी है।
इसी प्रकार पावर ग्रिड टेली सर्विस लिमिटेड द्वारा सीएसआर के तहत उपलब्ध कराए गए लगभग 80 लाख रुपये मूल्य के आधुनिक चिकित्सा उपकरण भी पूरी क्षमता से उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं। इनमें डेंटल एक्स-रे, डेंटल चेयर और विभिन्न आधुनिक लैब उपकरण शामिल हैं। डेंटल सेवाएं किसी तरह संचालित हो रही हैं, लेकिन लैब टेक्नीशियन की कमी के कारण अधिकांश लैब उपकरण उपयोग का इंतजार कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने जुलाई 2024 में भारतीय जन स्वास्थ्य मानकों (आईपीएचएस) के अनुरूप चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों सहित लगभग 60 पदों के सृजन एवं तैनाती का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन करीब दो वर्ष बाद भी इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। वार्ड बॉय, वार्ड आया, डाटा एंट्री ऑपरेटर और सफाई कर्मियों की कमी भी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सीधा असर डाल रही है।
अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. सुधीर कन्याल का कहना है कि सीमित स्टाफ के साथ 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है। दिनभर ओपीडी संभालने के बाद चिकित्सकों को रात्रिकालीन सेवाएं भी देनी पड़ती हैं। आवश्यक चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
इस बीच क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए कई बार विधायक, सांसद और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया है। रेडियोलॉजी सेवाओं की कमी को दूर करने के लिए भी प्रयास किए गए हैं। जानकारी के अनुसार टनकपुर में तैनात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ललित मोहन रखोलिया हल्दूचौड़ सीएचसी में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सेवाएं देने के लिए अपनी सहमति दे चुके हैं। अब केवल स्वास्थ्य निदेशक कुमाऊं के आदेश का इंतजार है। यदि आदेश जारी हो जाते हैं तो सप्ताह में कम से कम तीन दिन क्षेत्रवासियों को रेडियोलॉजी सेवाओं का लाभ मिल सकता है और अल्ट्रासाउंड सहित कई जांचों के लिए मरीजों की हल्द्वानी पर निर्भरता कम हो जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय भी हस्तक्षेप कर चुका है। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य गोविंद बल्लभ भट्ट के अनुसार, 15 अप्रैल 2026 को उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को छह माह के भीतर अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार करने, रिक्त पदों को भरने, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा विस्तृत प्रगति रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
हल्दूचौड़ और आसपास के क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि जब अस्पताल में भवन, आधुनिक उपकरण, एंबुलेंस और अन्य आधारभूत सुविधाएं मौजूद हैं, तब केवल कर्मचारियों की कमी के कारण जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति और संसाधन उपयोग के इंतजार में हैं, जबकि मरीज बेहतर इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं।
अब सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग और शासन इस अस्पताल को वास्तव में क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे, या फिर करोड़ों रुपये की लागत से तैयार संसाधन यूं ही कर्मचारियों और आदेशों की प्रतीक्षा में पड़े रहेंगे। क्षेत्र की डेढ़ लाख आबादी को अब आश्वासनों नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के धरातल पर दिखाई देने वाले सुधार का इंतजार है।

उत्तराखंड