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बंदरों को दाना, जनता को परेशानी!
जनप्रतिनिधियों की फीडिंग पर सवाल, उत्तराखंड में बंदर समस्या फिर बनी बहस का मुद्दा।

दर्पण न्यूज 24/7
देहरादून। उत्तराखंड में बंदरों की बढ़ती समस्या के बीच जनप्रतिनिधियों द्वारा सार्वजनिक रूप से उन्हें भोजन कराए जाने को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। हाल ही में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और अब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता तीरथ सिंह रावत के बंदरों को दाना डालने के वीडियो व तस्वीरें सामने आने के बाद आम जनता और सामाजिक संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई है।
लोगों का सवाल है कि जब राज्य में बंदर किसानों की फसलें तबाह कर रहे हैं, घरों में घुस रहे हैं और बच्चों व बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में है, तब जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों द्वारा ऐसी गतिविधियां क्या समस्या को और बढ़ावा नहीं दे रहीं?
कानून और प्रकृति के खिलाफ फीडिंग?
वन्यजीव मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों या अन्य वन्यजीवों को भोजन कराना Wildlife Protection Act की भावना के विपरीत है। इससे वन्यजीवों की प्राकृतिक आदतें बदलती हैं और उनकी संख्या असंतुलित रूप से बढ़ती है, जिसका सीधा असर मानव-वन्यजीव संघर्ष के रूप में सामने आता है।
किसानों की बढ़ती चिंता
प्रदेश के कई पहाड़ी जिलों में बंदरों के आतंक से किसान लगातार नुकसान झेल रहे हैं। खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो रही हैं और कई इलाकों में बंदरों के घरों में घुसने की घटनाएं आम हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान धरातल पर नजर नहीं आया।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल
सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब प्रभावशाली जनप्रतिनिधि स्वयं बंदरों को भोजन कराते हैं, तो इससे आम जनता को यह संदेश जाता है कि ऐसा करना सही है। नतीजतन लोग भी सार्वजनिक स्थानों पर फीडिंग करने लगते हैं, जिससे समस्या और विकराल होती जा रही है।
रेखा आर्य वर्तमान में कैबिनेट मंत्री हैं और तीरथ सिंह रावत राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं—ऐसे में उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे प्रतीकात्मक गतिविधियों के बजाय जनजागरूकता और ठोस समाधान की दिशा में पहल करें।
क्या हो सकता है स्थायी समाधान?
वन विभाग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार सरकार को दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी, जिसमें शामिल हों—
बंदरों के लिए अलग व सुरक्षित हैबिटेट विकसित करना
बड़े स्तर पर नसबंदी (स्टेरलाइजेशन) अभियान
सार्वजनिक स्थानों पर फीडिंग पर सख्ती और जागरूकता अभियान
किसानों को फसल सुरक्षा के लिए तकनीकी व आर्थिक सहयोग
जनता की मांग
प्रदेशवासियों का कहना है कि बंदर समस्या अब केवल वन्यजीव मुद्दा नहीं रही, बल्कि यह किसानों की आजीविका और ग्रामीण जीवन से जुड़ा गंभीर संकट बन चुकी है। लोगों को उम्मीद है कि सरकार और जनप्रतिनिधि जल्द ही इस पर ठोस और प्रभावी कदम उठाएंगे—ताकि बंदरों को दाना नहीं, समाधान मिले।