








पुरानी पेंशन पर वार! 18 फरवरी को देहरादून में कर्मचारियों की महा रैली का ऐलान !
♦दर्पण न्यूज 24/7 | विशेष रिपोर्ट
देहरादून।
उत्तराखण्ड में पुरानी पेंशन योजना को लेकर एक बार फिर बड़ा आंदोलन खड़ा होता दिख रहा है। सेवानिवृत्त कार्यप्रभारित से नियमित कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (सिंचाई विभाग व लोक निर्माण विभाग) ने सरकार पर उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए 18 फरवरी 2026 को देहरादून में विशाल रैली निकालने का ऐलान किया है।
समिति के प्रान्तीय अध्यक्ष खेमराज सिंह कुण्डरा ने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय के 2 सितम्बर 2019 के आदेश के अनुपालन में सिंचाई व लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कार्यप्रभारित सेवा जोड़कर पुरानी पेंशन देने के शासनादेश जारी हुए थे। इसके तहत करीब 80 प्रतिशत कर्मचारियों को लाभ भी मिला।
लेकिन अब वित्त विभाग द्वारा 16 जनवरी 2026 को जारी नए शासनादेश से न सिर्फ शेष 20 प्रतिशत कर्मचारियों को पेंशन से वंचित कर दिया गया है, बल्कि पहले से पेंशन ले रहे कार्मिकों की पेंशन पर भी रोक लगा दी गई है। इससे हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
संघ का आरोप है कि
कैबिनेट ने 24 दिसम्बर 2026 को लगभग 6000 कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने का निर्णय लिया था।
सरकार की ओर से सचिव स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे सार्वजनिक भी किया गया।
इसके बावजूद बाद में विपरीत शासनादेश जारी कर 2005 के बाद नियमित हुए कर्मचारियों को कार्यप्रभारित सेवा का लाभ देने से इनकार कर दिया गया।
संघ ने यह भी कहा कि कई बार मुख्यमंत्री कार्यालय से मिलने का अनुरोध किया गया, लेकिन समय नहीं दिया गया, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है।
रैली की प्रमुख मांगें
सिंचाई व लोक निर्माण विभाग के सभी कार्यप्रभारित से नियमित कर्मचारियों को कार्यप्रभारित सेवा जोड़कर पुरानी पेंशन का लाभ।
राज्य के सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
सरकार व शासन उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन न करें।
18 फरवरी को परेड ग्राउंड से सचिवालय तक मार्च
संघ ने सभी कर्मचारी संगठनों, निगम कर्मचारियों और पुरानी पेंशन बहाली मोर्चा से रैली में शामिल होने की अपील की है।
रैली 18 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे परेड ग्राउंड से सचिवालय तक निकाली जाएगी, जहां तीन सूत्रीय ज्ञापन शासन को सौंपा जाएगा।
संघ ने सरकार को 7 फरवरी 2026 तक समस्याओं के समाधान का अल्टीमेटम दिया है। समाधान न होने की स्थिति में आंदोलन और तेज करने की चेतावनी भी दी गई है।
अब देखना यह है कि सरकार कर्मचारियों की इस हुंकार को गंभीरता से लेती है या उत्तराखण्ड एक बड़े कर्मचारी आंदोलन का गवाह बनने जा रहा है।
— दर्पण न्यूज 24/7
