खबरें शेयर करें -

वन विभाग के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को रक्षाबंधन पर मिल सकता है बड़ा तोहफा? हाईकोर्ट में कल होनी है अहम सुनवाई।
2014-15 से कार्यरत कर्मचारियों के समान वेतन और ईपीएफ का मामला, अफसरों को पहले ही जारी हो चुका है अवमानना नोटिस।
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | प्रमोद बमेटा
नैनीताल। उत्तराखंड वन विभाग में वर्ष 2014-15 से कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कल का दिन बेहद अहम हो सकता है। समान कार्य के लिए समान वेतन और ईपीएफ से जुड़े मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में 28 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर कर्मचारियों की निगाहें टिकी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या हाईकोर्ट की सुनवाई इन कर्मचारियों के लिए रक्षाबंधन से पहले किसी बड़े राहत भरे फैसले की राह खोल सकती है?
मामले में हाईकोर्ट पहले ही उत्तराखंड वन विभाग के प्रिंसिपल सचिव और प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) को अवमानना नोटिस जारी कर चुका है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में होनी है।
दरअसल, वन विभाग में लंबे समय से कार्यरत अर्जुन सिंह व अन्य कर्मचारियों ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेश का अनुपालन न किए जाने को लेकर अवमानना याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 19 मार्च 2026 को आदेश जारी कर उन्हें सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना प्रत्यावेदन देने तथा उस पर तीन माह के भीतर विधि अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। कर्मचारियों का कहना है कि निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद उनके प्रत्यावेदन पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।
2014-15 से कर रहे काम, फिर वेतन में क्यों अंतर?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे वर्ष 2014-15 से लगातार वन विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद समान प्रकृति का काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं में अंतर है। उनका तर्क है कि सरकार ने 16 अगस्त 2017 को शासनादेश जारी कर उपनल और आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार की बात कही थी।
कर्मचारियों का आरोप है कि एक ही तरह का काम करने के बावजूद उपनल कर्मचारियों को अपेक्षाकृत अधिक वेतन और सुविधाएं मिल रही हैं, जबकि आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को कम वेतन पर काम करना पड़ रहा है। इसी आधार पर उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन, ईपीएफ और अन्य देय लाभ दिए जाने की मांग की है।
अब निगाहें हाईकोर्ट पर
कर्मचारियों का कहना है कि जब अदालत ने उनके प्रत्यावेदन पर निर्धारित समय में निर्णय लेने के निर्देश दिए थे, तो उसका पालन किया जाना चाहिए था। आदेश का अनुपालन नहीं होने पर उन्होंने अवमानना की कार्रवाई की मांग की है।
अब 28 अगस्त की सुनवाई में वन विभाग के अधिकारियों की ओर से क्या जवाब दाखिल किया जाता है और हाईकोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है, इस पर कर्मचारियों की नजरें टिकी हैं।
यदि अदालत कर्मचारियों के पक्ष में कोई महत्वपूर्ण निर्देश देती है तो लंबे समय से समान वेतन और ईपीएफ की मांग कर रहे वन विभाग के कर्मचारियों के लिए यह बड़ी राहत मानी जा सकती है। रक्षाबंधन के मौके पर हजारों कर्मचारियों की उम्मीदें अब हाईकोर्ट की कल होने वाली सुनवाई से जुड़ गई हैं।

उत्तराखंड