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पहाड़ों के बाद अब भावर में आतंक का पर्याय बन रहे हिंसक वन्यजीव।
आबादी के बीच लगातार मंडरा रहा तेंदुआ, जयपुर खीमा में दहशत; ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | प्रमोद बमेटा
लालकुआं। पहाड़ों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं अब भावर के आबादी वाले इलाकों में भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ाने लगी हैं। मोटाहल्दू के ग्राम पंचायत जयपुर खीमा में पिछले कई दिनों से आबादी के बीच तेंदुए की लगातार आवाजाही ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। घरों के आसपास बेखौफ घूमते तेंदुए ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। शाम ढलते ही गांव की रफ्तार थमने लगी है और लोग जरूरी काम के लिए भी घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, 25 अगस्त की शाम करीब 8:30 बजे ग्राम निवासी पंकज कबडाल के घर के पास तेंदुआ दिखाई दिया। घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी तेंदुए की गतिविधियां कैद हुई हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सीसीटीवी फुटेज के साथ आसपास मिले पगचिह्नों की जांच की। तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग की ओर से क्षेत्र में कैमरे भी लगाए गए हैं।
लेकिन निगरानी के बावजूद आबादी के आसपास तेंदुए की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता कम नहीं की है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ यदि बार-बार घरों के आसपास पहुंच रहा है तो इसे महज जंगल से भटककर आई वन्यजीव की सामान्य गतिविधि मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सबसे बड़ा खतरा उन बच्चों और बुजुर्गों को है, जो शाम के समय अक्सर घरों के आसपास निकलते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, तेंदुए की मौजूदगी के चलते अभिभावक बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं। शाम होते ही गांव में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि तेंदुए की आवाजाही इसी तरह जारी रही और समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया गया तो किसी दिन यह डर गंभीर हादसे में बदल सकता है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त संख्या में कैमरा ट्रैप लगाने, नियमित गश्त बढ़ाने और प्रशिक्षित वनकर्मियों की तैनाती करने की मांग की है। इसके साथ ही नियमानुसार आवश्यक होने पर पिंजरा और अन्य वैधानिक उपायों के माध्यम से तेंदुए को पकड़ने की कार्रवाई किए जाने की मांग भी उठाई गई है। ग्रामीणों ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर तत्काल जागरूकता अभियान चलाने और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण जरूरी है, लेकिन आबादी में लगातार सक्रिय किसी हिंसक वन्यजीव से उत्पन्न खतरे को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कार्रवाई किसी अप्रिय घटना के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होनी चाहिए। आखिर किसी इंसानी जान को खतरा पैदा होने के बाद कार्रवाई करने का इंतजार क्यों किया जाए?
इसी मांग को लेकर ग्राम जयपुर खीमा निवासी विनीत कबडाल एवं समस्त ग्रामवासियों की ओर से वन क्षेत्राधिकारी उमेश चंद्र आर्य को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन देने वालों में विनीत कबडाल, राहुल कबडाल, आनंद कबडाल, योगेश कपिल, दीपू कबडाल और महिपाल भौर्याल सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
पहाड़ों में गुलदार और अन्य वन्यजीवों की आबादी में घुसपैठ लंबे समय से चिंता का विषय रही है, लेकिन अब भावर क्षेत्र के गांवों में भी लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं संकेत दे रही हैं कि जंगल और आबादी के बीच की दूरी तेजी से कम हो रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ एक तेंदुए की मौजूदगी का नहीं, बल्कि मानव और वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती से निपटने की वन विभाग की तैयारियों का भी है।
फोटो परिचय— तेंदुए की दहशत के चलते वन क्षेत्राधिकारी को ज्ञापन देते बरेली रोड क्षेत्र के ग्रामीण।

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