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दूध से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, डीएम ने कसे प्रबंधन के पेंच!
कमेड़ी दुग्ध अवशीतन केंद्र व आंचल आउटलेट का निरीक्षण, समयबद्ध भुगतान और आय बढ़ाने पर जोर!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो बागेश्वर।
जनपद में दुग्ध उत्पादन एवं विपणन व्यवस्था को सशक्त और व्यवस्थित बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने सक्रिय पहल शुरू कर दी है। जिलाधिकारी आकांक्षा कोड़े ने दुग्ध अवशीतन केंद्र कमेड़ी, दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति क्षेत्रपाल तथा विकास भवन स्थित आंचल आउटलेट का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने संचालन प्रणाली, स्वच्छता व्यवस्था, भुगतान प्रक्रिया तथा दुग्ध उत्पादन से आय सृजन की संभावनाओं की विस्तृत समीक्षा की। कमेड़ी दुग्ध अवशीतन केंद्र में उन्होंने केंद्र के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए दो पीआरडी जवानों की तैनाती हेतु संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजने के निर्देश दिए। साथ ही दुग्ध संग्रहण केंद्र में साफ-सफाई को और अधिक सुदृढ़ रखने के निर्देश दिए, ताकि गुणवत्तापूर्ण दूध संग्रहण सुनिश्चित किया जा सके।
डीएम ने कृषकों को चारा नर्सरी विकास के लिए प्रोत्साहित करने, तकनीकी एवं संसाधनात्मक सहयोग उपलब्ध कराने तथा पात्र समिति सदस्यों को आरआईपी योजना के अंतर्गत ‘अल्ट्रा पुअर पैकेज’ से लाभान्वित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादकों, विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों को समयबद्ध भुगतान मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उत्पादन में भी वृद्धि होगी।
इसके बाद जिलाधिकारी ने विकास भवन स्थित आंचल आउटलेट का निरीक्षण किया। उन्होंने आउटलेट का संचालन प्रतिदिन सुबह चार घंटे एवं शाम चार घंटे नियमित रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। आय-व्यय का पारदर्शी लेखा-जोखा रखने, सभी रजिस्टर अद्यतन बनाए रखने तथा रिकॉर्ड प्रबंधन को व्यवस्थित करने पर विशेष जोर दिया। डीएम ने अगले माह तक 50 हजार रुपये की आय का लक्ष्य निर्धारित करते हुए उसी अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी आर.सी. तिवारी भी मौजूद रहे। सहायक निदेशक डेयरी अनुराग मिश्रा ने जानकारी दी कि कमेड़ी अवशीतन केंद्र में 85 समितियों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 2200 लीटर दुग्ध संग्रहण किया जा रहा है, जबकि दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति क्षेत्रपाल में प्रतिदिन करीब 240 लीटर दूध एकत्रित किया जाता है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि दुग्ध की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। गुणवत्ता परीक्षण, स्वच्छता मानकों और वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने दुग्ध उत्पादन को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम बताते हुए युवाओं एवं महिलाओं को डेयरी गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया, जिससे स्वरोजगार के अवसर बढ़ें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिल सके।

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