पश्चिम एशिया में जंग की आहट, भारत की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा खतरा! तेल उछला, महंगाई और रुपये पर संकट के बादल!
दर्पण न्यूज 24/7ब्यूरो नई दिल्ली।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत की आर्थिक सेहत पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे देश में महंगाई बढ़ने और रुपये की विनिमय दर में गिरावट की आशंका गहरा गई है।
अर्थशास्त्री और एन. आर. भानुमूर्ति का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट का असर भारत पर व्यापार और वित्तीय चैनलों के जरिए तुरंत दिखाई देने लगा है। विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी और रुपये की कमजोरी के चलते घरेलू शेयर बाजार में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।
2023 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर तेल
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत शुक्रवार को करीब 8.5 प्रतिशत उछलकर 92.69 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जो 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
वहीं अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट का भाव 12.2 प्रतिशत बढ़कर 90.9 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
सिर्फ एक सप्ताह में ही ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर से बढ़कर 92 डॉलर के आसपास पहुंच गया है, यानी लगभग 32 प्रतिशत की छलांग। उधर एलएनजी की कीमतों में भी करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
महंगाई और व्यापार घाटे पर दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक बाजार में तेल महंगा बना रहा तो भारत का व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा दोनों बढ़ सकते हैं।
यदि सरकार घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करती है, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब और महंगाई दर पर पड़ेगा।
ऊर्जा कीमतों में उछाल के बीच घरेलू रसोई गैस के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। शनिवार को एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये और वाणिज्यिक सिलेंडर में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी नजर
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होता है तो भारत के लिए स्थिति और गंभीर हो सकती है। फारस की खाड़ी से अरब सागर को जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन रास्तों में से एक है।
इस मार्ग के बाधित होने से न केवल तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं बल्कि आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो सकती है। बताया जा रहा है कि कतर ने पहले ही गैस उत्पादन रोकने का संकेत दिया है।
रूस से आयात दे सकता है राहत
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल आयात जारी रखने से वैश्विक बाजार में कीमतों को कुछ हद तक संतुलन मिल सकता है। लेकिन गैस की कीमतों को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है।
100 डॉलर पार हुआ तेल तो बढ़ेगी महंगाई
भानुमूर्ति के अनुसार कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की वृद्धि से भारत में मुद्रास्फीति करीब 0.7 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। अगर तेल की कीमतें 60 डॉलर के स्तर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो इसका असर महंगाई और आर्थिक विकास दोनों पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
युद्ध की आहट के बाद रुपये की विनिमय दर भी दबाव में आ गई थी और डॉलर के मुकाबले यह 92.19 तक पहुंच गई थी। बाद में भारतीय रिज़र्व बैंक के हस्तक्षेप से इसमें कुछ सुधार आया।
कुल मिलाकर पश्चिम एशिया का संकट सिर्फ क्षेत्रीय तनाव नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है—और इसका सीधा असर भारत की जेब और बाजार दोनों पर पड़ सकता है।
